मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भिंड यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता की परीक्षा ले ली। मुख्यमंत्री रविवार को दंदरौआ हनुमान मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे। धार्मिक कार्यक्रम पूरा करने के बाद उन्हें हेलीकॉप्टर से ग्वालियर के लिए रवाना होना था। हेलीपैड पर सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और मुख्यमंत्री के साथ मौजूद अन्य जनप्रतिनिधि भी हेलीकॉप्टर में बैठ चुके थे। इसी बीच हेलीपैड के ऊपर एक ड्रोन उड़ता दिखाई दिया। ड्रोन को देखते ही सुरक्षा अधिकारियों के बीच हलचल बढ़ गई और पायलट ने सुरक्षा नियमों का हवाला देते हुए हेलीकॉप्टर को तत्काल उड़ाने से इनकार कर दिया। कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में आ गया।
ड्रोन दिखते ही सक्रिय हुई सुरक्षा एजेंसियां
मुख्यमंत्री की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मौके पर मौजूद पुलिस और विशेष सुरक्षा दल तुरंत हरकत में आ गए। ड्रोन की मौजूदगी को गंभीरता से लेते हुए आसपास के क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी गई। अधिकारियों ने यह पता लगाने का प्रयास शुरू किया कि आखिर ड्रोन कौन उड़ा रहा है और उसका उद्देश्य क्या है। वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान हेलीपैड के आसपास किसी भी प्रकार की अनधिकृत उड़ान को सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाता है। इसलिए घटना को हल्के में नहीं लिया गया। सुरक्षा टीमों ने आसपास के भवनों और मंदिर परिसर की छतों पर भी नजर रखी। इसी दौरान एक युवक संदिग्ध गतिविधि करते हुए दिखाई दिया, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।
बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने की बात आई सामने
जांच के दौरान पुलिस ने मंदिर परिसर की छत से एक युवक को हिरासत में लिया। उसके पास मौजूद ड्रोन को भी जब्त कर लिया गया। पूछताछ में युवक की पहचान राघवेंद्र खेमरिया के रूप में हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार वह मंदिर से जुड़े सोशल मीडिया कार्यों में सहयोग करता है और कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए ड्रोन उड़ा रहा था। हालांकि जांच में यह बात सामने आई कि ड्रोन उड़ाने के लिए किसी प्रकार की प्रशासनिक या सुरक्षा अनुमति नहीं ली गई थी। यही वजह रही कि यह मामला मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील विषय बन गया। अधिकारियों का कहना है कि चाहे उद्देश्य वीडियो बनाना रहा हो, लेकिन वीवीआईपी कार्यक्रम के दौरान बिना अनुमति ड्रोन उड़ाना सुरक्षा नियमों के खिलाफ है और इसे गंभीर चूक माना जा सकता है।
10 मिनट रुकी रही उड़ान
ड्रोन की पहचान और क्षेत्र की सुरक्षा जांच पूरी होने तक मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर करीब 10 मिनट तक हेलीपैड पर ही खड़ा रहा। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके का दोबारा सत्यापन किया और यह सुनिश्चित किया कि किसी प्रकार का खतरा मौजूद नहीं है। इसके बाद हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति दी गई और मुख्यमंत्री ग्वालियर के लिए रवाना हुए। फिलहाल पुलिस और अन्य एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि यह केवल लापरवाही का मामला था या सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन में कहीं कोई बड़ी कमी रह गई। घटना के बाद वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
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