शनिवार को बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में सनातन हिंदू एकता पदयात्रा अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई।
यह यात्रा फरीदाबाद के दशहरा मैदान (एनआईटी) से शुरू होकर तिकोना पार्क, हार्डवेयर चौक होते हुए बल्लभगढ़ के दशहरा मैदान तक पहुंची।
यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और अनुयायियों ने भाग लिया। जगह-जगह पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर का स्वागत किया।
“भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का संकल्प लें”
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और अनिरुद्धाचार्य ने यात्रा के दौरान लोगों से कहा कि अब समय आ गया है जब हर सनातनी को धर्म के लिए खड़ा होना होगा। “हम सब मिलकर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का संकल्प लें। यही हमारी संस्कृति, यही हमारी पहचान है।”
उन्होंने आगे कहा कि सनातन धर्म किसी जाति या पंथ का नहीं बल्कि मानवता का मार्ग है। “जो व्यक्ति सत्य, करुणा और सेवा के मार्ग पर चलता है, वही सच्चा सनातनी है।”
आध्यात्मिक वक्ता आनिरुद्धाचार्य भी जुड़े
यात्रा के तीसरे दिन प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता आनिरुद्धाचार्य भी पदयात्रा में शामिल हुए।
उनकी उपस्थिति से श्रद्धालुओं में नया उत्साह देखने को मिला।
आनिरुद्धाचार्य ने कहा “जब हम सनातन धर्म को अपनाते हैं, तो केवल पूजा नहीं करते बल्कि मानवता, करुणा और धर्म की रक्षा करते हैं।”उन्होंने लोगों से अपील की कि धर्म को राजनीति से ऊपर रखकर समाज में प्रेम और एकता फैलाएं।
हम जीवनभर सनातन धर्म का पालन करेंगे
Bageshwar Dham Dhirendra Krishna Shastri ने यात्रा के दौरान उपस्थित सभी भक्तों को शपथ दिलाई “हम जीवनभर सनातन धर्म का पालन करेंगे,
अपने गांव और शहर को भेदभाव और छुआछूत से मुक्त बनाएंगे,
और हर दिन कम से कम एक घंटा सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित करेंगे।”
यह शपथ लेते समय हजारों लोगों ने हाथ उठाकर “जय श्री राम” और “हर हर महादेव” के नारे लगाए। पूरा माहौल धार्मिक उत्साह से भर गया।
यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
सनातन हिंदू एकता पदयात्रा में लोगों का उत्साह देखने लायक था।
हर उम्र के श्रद्धालु ध्वज लेकर चल रहे थे, महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भजन गाए, जबकि युवा “भारत माता की जय” के जयकारे लगा रहे थे।
यात्रा के मार्ग में जगह-जगह धर्मसभा स्थल, भंडारा केंद्र और मेडिकल सहायता शिविर लगाए गए थे।
कई जगहों पर भक्तों ने यात्रा का स्वागत आरती और पुष्पवर्षा से किया।
“धर्म को कर्म में उतारना होगा”
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्म और आचरण का धर्म है। “अगर हम मंदिर जाते हैं लेकिन मन में द्वेष रखते हैं, तो वह पूजा अधूरी है। हमें सनातन को अपने व्यवहार, समाज और राष्ट्र के हर कार्य में लाना होगा।”उन्होंने यह भी कहा कि भारत की शक्ति उसकी संस्कृति और संस्कारों में है, जिसे हमें हर हाल में बचाए रखना है।
