नीट पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय मधर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया है, लेकिन इस घटनाक्रम का असर अब कई राज्यों की राजनीति पर भी दिखाई देने लगा है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पंजाब में अलग-अलग मुद्दों को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच शिक्षा व्यवस्था पर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। कई राजनीतिक दलों का कहना है कि जब केंद्र में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया गया है तो राज्यों में भी शिक्षा से जुड़े विवादों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी कारण तीन राज्यों में शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग लगातार जोर पकड़ रही है।
आमने-सामने आए जगन और नारा लोकेश
आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने जिला चयन समिति (DSC) भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र में नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर इस्तीफा दिया जा सकता है तो राज्य सरकार को भी उसी सिद्धांत का पालन करना चाहिए। जगन ने सोशल मीडिया के जरिए शिक्षा मंत्री नारा लोकेश से पद छोड़ने का सवाल पूछा। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षा में लाखों अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं और पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। दूसरी ओर नारा लोकेश ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जो लोग नैतिकता की बात कर रहे हैं, उनका राजनीतिक रिकॉर्ड खुद कई सवालों के घेरे में रहा है। उन्होंने साफ किया कि सरकार परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए काम कर रही है और विपक्ष के आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।
तेलंगाना और पंजाब में भी शिक्षा विभाग पर बढ़ा दबाव
तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी छोड़ने की मांग की है। भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार छात्रों की ट्यूशन फीस री-इंबर्समेंट योजना के तहत लंबित भुगतान समय पर नहीं कर पा रही है, जिससे लाखों विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि सरकार शिक्षा से जुड़े बुनियादी मुद्दों का समाधान नहीं कर सकती तो उसे जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए। वहीं पंजाब में भी शिक्षा विभाग से जुड़े कथित परीक्षा पेपर लीक मामले ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि फार्मेसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने से हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। विपक्ष का कहना है कि यदि सरकार पारदर्शिता की बात करती है तो संबंधित मंत्री के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही पर बढ़ी राष्ट्रीय बहस
देशभर में लगातार सामने आए परीक्षा विवादों के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार पहले ही पेपर लीक रोकने के लिए कानून में बदलाव और परीक्षा सुधार टास्क फोर्स जैसे कदमों की घोषणा कर चुकी है। अब राज्यों में भी परीक्षा प्रणाली, भर्ती प्रक्रियाओं और छात्रों के हितों को लेकर जवाबदेही की मांग उठ रही है। हालांकि जिन मामलों को लेकर इस्तीफे की मांग की जा रही है, उनमें संबंधित सरकारों और मंत्रियों ने आरोपों से इनकार किया है और अपने-अपने स्तर पर कार्रवाई या जांच की बात कही है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों का भरोसा बहाल करना केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों के सामने बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
Read More-धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर BJP सांसद की बेटी ने जताई खुशी, नहीं हटाई पोस्ट, फिर अचानक क्या हुआ?
