लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की एक टिप्पणी ने गुरुवार को सियासी माहौल गरमा दिया। रचनात्मक कांग्रेस सम्मेलन के दौरान विदेश नीति पर बात करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी नेताओं से मुलाकात और उन्हें गले लगाने के अंदाज की मिमिक्री की। राहुल गांधी का यह अंदाज सामने आने के बाद बीजेपी ने इसे प्रधानमंत्री पद और भारत की विदेश नीति से जुड़ा गंभीर विषय बताया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता को राजनीतिक असहमति जताते समय भी भाषा और व्यवहार की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। इस मामले को लेकर दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी का वीडियो साझा करते हुए उनकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी के लिए झारखंड के रांची स्थित कांके की जगह ठीक हो सकती है। बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने भी बिना राहुल गांधी का नाम लिए सोशल मीडिया पर टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि जब लोग ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाते तो अभद्र व्यवहार करने लगते हैं और तर्कों में हारने के बाद मर्यादा की सीमाएं तोड़ देते हैं। बीजेपी नेताओं की इन प्रतिक्रियाओं के बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक चर्चा में आ गया।
आपको लगता है कि राहुल गांधी जी की मानसिक स्थिति ठीक है? झारखंड के राँची में कांके इनके लिए ठीक जगह है pic.twitter.com/skrSEXtSkA
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) August 13, 2026
हिमंत सरमा और विनोद तावड़े ने बताया गंभीर मामला
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने राहुल गांधी के बयान को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक मित्र देश की महिला राष्ट्राध्यक्ष के संदर्भ में आपत्तिजनक टिप्पणी करना उचित नहीं है। उनका कहना था कि मंच और दर्शकों के बीच मौजूद लोगों का इस पर हंसना भी चिंता का विषय है। वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की ओर से किसी संप्रभु देश के राष्ट्राध्यक्ष और भारत के प्रधानमंत्री के बारे में अशोभनीय टिप्पणी करना देश की राजनीति के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के संदर्भ में भी अनुचित बताया।
प्रह्लाद जोशी बोले- राहुल गांधी में दिख रही हताशा
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के रवैये में निराशा और हताशा नजर आती है। जोशी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रधानमंत्री या किसी भी बड़े राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्ति की आलोचना की जा सकती है, लेकिन इसके लिए सभ्य भाषा और राजनीतिक शिष्टाचार जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने इस परंपरा की अनदेखी की है। इस पूरे विवाद के बीच बीजेपी ने राहुल गांधी के बयान को लेकर कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है, जबकि विपक्ष की ओर से विदेश नीति और प्रधानमंत्री की कूटनीति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
