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भरत तिवारी के विरोध में ये क्या बोले केंद्रीय मंत्री? कहा ‘वह कोई क्रांतिकारी नहीं था उसे…’

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर जीतन राम मांझी का बड़ा बयान सामने आया है। केंद्रीय मंत्री ने दलित और मुस्लिम एंगल का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए। जानिए पूरे विवाद की विस्तृत जानकारी।

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बिहार में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। एक तरफ जहां विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के कुछ नेता इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख Jitan Ram Manjhi ने इस पूरे विवाद पर अलग रुख अपनाया है। मांझी ने साफ तौर पर कहा है कि इस मामले को जातीय और राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। उनके ताजा बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। खास बात यह है कि उन्होंने एनकाउंटर को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए दलित और मुस्लिम समुदायों से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया, जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।

सोशल मीडिया पोस्ट में उठाए कई सवाल

मांझी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अक्सर जब किसी दलित या मुस्लिम व्यक्ति के एनकाउंटर की बात होती है तो कुछ लोग उसे अपराधी या उग्रवादी बताकर घटना को सही ठहराने की कोशिश करते हैं, लेकिन वही लोग अब भरत तिवारी एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने इस विरोधाभास को लेकर सवाल खड़े किए और कहा कि कानून को सभी मामलों में समान रूप से देखा जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने यह भी पूछा कि भरत तिवारी के पास कथित तौर पर अवैध हथियार कैसे पहुंचा और इस पहलू पर चर्चा क्यों नहीं हो रही है। उनके अनुसार मामले के तथ्यों पर ध्यान देने के बजाय कुछ लोग इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में लगे हैं। मांझी के इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

 ‘संविधान या हथियार की ताकत’ वाला सवाल बना चर्चा का विषय

अपने बयान में मांझी ने यह भी कहा कि देश कानून और संविधान के अनुसार चलेगा, न कि हथियारों के बल पर। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना की जांच तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप हैं या उसके पास अवैध हथियार पाए गए हैं, तो इस पहलू की भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ राजनीतिक समूह इस मामले को लेकर भावनात्मक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मांझी के इस बयान के बाद समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष सक्रिय हो गए हैं। जहां एक वर्ग उनके बयान को कानून व्यवस्था के समर्थन के रूप में देख रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे विवाद को नया मोड़ देने वाला बयान मान रहा है।

 भरत तिवारी को लेकर सियासत जारी

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला पिछले कुछ दिनों से बिहार की राजनीति और सामाजिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। इस घटना को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं और जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है। मांझी ने अपने बयान में दावा किया कि भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी व्यक्तित्व नहीं थे और उनके खिलाफ पहले भी आपराधिक मामलों में कार्रवाई हो चुकी थी। हालांकि इस मामले में अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें हैं। ऐसे में सभी की निगाहें जांच प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।

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