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क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आएगी गिरावट? सरकार ने कर दिया बड़ा खुलासा, जाने क्या कहा

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का बड़ा बयान। जानिए आखिर क्यों फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम कम नहीं होंगे और सरकार ने इसके पीछे क्या वजह बताई।

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देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर लोग लंबे समय से राहत का इंतजार कर रहे हैं। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई, जिसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि भारत में भी पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है। लेकिन केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ कहा है कि फिलहाल ईंधन की कीमतें कम करने की कोई योजना नहीं है। उनका कहना है कि सरकार ने पिछले कई सालों में अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर आम लोगों पर कम से कम पड़ने दिया है। इसी वजह से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी समय से लगभग स्थिर बनी हुई हैं।

अभी दाम कम करना क्यों संभव नहीं?

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकारी तेल कंपनियां अभी भी पुराने नुकसान की भरपाई कर रही हैं। इसके अलावा कंपनियों के पास ऐसा तेल भी मौजूद है, जिसे उस समय खरीदा गया था जब कच्चे तेल की कीमतें बहुत ज्यादा थीं। ऐसे में अगर अभी पेट्रोल-डीजल के दाम कम किए जाते हैं तो कंपनियों को और नुकसान हो सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले चार साल में पेट्रोल की कीमत में करीब 5.58 प्रतिशत और डीजल की कीमत में 6.23 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी हुई है। सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में कीमतें घटाना सही फैसला नहीं होगा।

 संकट के समय भी नहीं रुकी ईंधन की सप्लाई

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास तनाव बढ़ा था, लेकिन इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर नहीं पड़ा। देश के करीब 1.07 लाख पेट्रोल पंप पूरे समय सामान्य रूप से चलते रहे और कहीं भी ईंधन खत्म होने की नौबत नहीं आई। सरकार का कहना है कि उसने पहले से तैयारी कर रखी थी, इसलिए लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। सरकार ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी लागत का बड़ा हिस्सा खुद उठाया, ताकि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

आगे क्या है सरकार की तैयारी?

सरकार आने वाले समय में देश की ऊर्जा व्यवस्था को और मजबूत बनाना चाहती है। इसके लिए नई रिफाइनरियां बनाई जा रही हैं और पुरानी रिफाइनरियों का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक भारत की रिफाइनिंग क्षमता को 309.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंचाया जाए। उम्मीद है कि अगले दो साल में कई नई परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी। इससे देश की ऊर्जा जरूरतें बेहतर तरीके से पूरी होंगी। फिलहाल सरकार का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत राहत मिलने की संभावना नहीं है।

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