कर्नल सोफिया कुरैशी को विशिष्ट सेवा मेडल देने की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब उनका नाम हाल के वर्षों में भारतीय सेना की सबसे सशक्त और प्रभावशाली महिला अधिकारियों में गिना जाने लगा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान वह रोज़ाना होने वाली प्रेस ब्रीफिंग का प्रमुख चेहरा थीं, जहां उन्होंने ठोस तथ्यों, सटीक आंकड़ों और आत्मविश्वास के साथ भारत की सैन्य कार्रवाई को दुनिया के सामने रखा। इन ब्रीफिंग्स में उनके साथ वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी मौजूद रहते थे। लेकिन कर्नल सोफिया की स्पष्ट भाषा और संयमित प्रस्तुति ने न केवल देशवासियों का भरोसा जीता, बल्कि पाकिस्तान के झूठे दावों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर कमजोर कर दिया। रक्षा सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सूचना युद्ध उतना ही अहम था जितना कि सैन्य कार्रवाई, और इस मोर्चे पर कर्नल सोफिया कुरैशी की भूमिका निर्णायक मानी गई।
सैन्य परिवार से सेना की शिखर पहचान तक
गुजरात के वडोदरा में जन्मी कर्नल सोफिया कुरैशी का सेना से रिश्ता पीढ़ियों पुराना है। उनके दादा भारतीय सेना में धार्मिक शिक्षक के रूप में सेवाएं दे चुके थे, जिससे अनुशासन और सेवा का भाव उनके जीवन में बचपन से ही शामिल रहा। पढ़ाई में भी वह हमेशा आगे रहीं। उन्होंने 1997 में महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी से बायोकेमिस्ट्री में मास्टर डिग्री प्राप्त की, लेकिन उनका सपना प्रयोगशाला तक सीमित नहीं था। देशसेवा का जुनून उन्हें चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी तक ले गया, जहां से उन्होंने सेना में कमीशन हासिल किया। एक महिला अधिकारी के रूप में उन्होंने हर उस चुनौती का सामना किया, जिसे अक्सर पुरुष प्रधान सैन्य ढांचे में मुश्किल माना जाता है। समय के साथ उनकी पहचान एक ऐसी अधिकारी के रूप में बनी, जो मैदान और रणनीति—दोनों में समान रूप से दक्ष हैं।
हर मोर्चे पर साबित की काबिलियत
कर्नल सोफिया कुरैशी का सैन्य रिकॉर्ड केवल एक ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। वर्ष 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुए ‘ऑपरेशन पराक्रम’ के दौरान उन्होंने पंजाब सीमा पर अहम जिम्मेदारी निभाई थी। उस समय उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ से कमेंडेशन कार्ड भी मिला। इसके बाद उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ राहत अभियानों में भी उल्लेखनीय योगदान दिया, जहां सैन्य अनुशासन के साथ मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी सेवाएं कम महत्वपूर्ण नहीं रहीं। उन्होंने करीब छह वर्षों तक कांगो में संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना मिशन में काम किया, जहां चुनौतीपूर्ण हालात में भारतीय सेना की पेशेवर छवि को मजबूत किया। वर्ष 2016 में उन्होंने एक बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की टुकड़ी का नेतृत्व कर इतिहास रच दिया, और ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय महिला अधिकारी बनीं।
सम्मान जो सिर्फ पदक नहीं, भरोसे की मुहर है
कर्नल सोफिया कुरैशी को मिलने वाला विशिष्ट सेवा मेडल उन 301 सैन्य अलंकरणों का हिस्सा है, जिन्हें राष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों और अन्य कर्मियों के लिए मंजूरी दी है। इस सूची में एक अशोक चक्र, तीन कीर्ति चक्र और 13 शौर्य चक्र जैसे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार भी शामिल हैं। इसके अलावा 30 परम विशिष्ट सेवा पदक, चार उत्तम युद्ध सेवा पदक, 56 अति विशिष्ट सेवा पदक, नौ युद्ध सेवा पदक, सेना, नौसेना और वायुसेना के विशिष्ट पदकों की लंबी सूची है। कर्नल सोफिया का नाम इस सम्मान सूची में शामिल होना इस बात का संकेत है कि आधुनिक युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि जानकारी, विश्वास और नेतृत्व से भी जीता जाता है। उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों की महिला अधिकारियों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है और यह दिखाती है कि भारतीय सेना में नेतृत्व का चेहरा तेजी से बदल रहा है।
