तेलंगाना के कमारैड्डी जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने लोगों को अंदर तक झकझोर दिया है। यहां नेशनल हाईवे पर स्थित एक ढाबे के आसपास कम से कम 15 बंदरों के शव बिखरे हुए पाए गए। यह दृश्य देखकर राहगीरों और ढाबे के आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। शुरुआत में लोगों को समझ ही नहीं आया कि इतने सारे बंदर एक साथ कैसे मर सकते हैं। ढाबे के बाहर, आसपास की जमीन पर और किनारे की झाड़ियों में पड़े बंदरों के शव देखकर माहौल बेहद डरावना हो गया। कुछ बंदर मरे पड़े थे तो कई ऐसे भी थे जो तड़प रहे थे, सांस लेने में तकलीफ महसूस कर रहे थे और बेहद कमजोर हालत में नजर आ रहे थे। घटना की खबर तेजी से आसपास के गांवों में फैल गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि यह मौतें सामान्य नहीं हैं, बल्कि किसी गंभीर कारण की वजह से हुई हैं। जल्द ही लोगों ने गांव के सरपंच और पशु चिकित्सा विभाग को इसकी सूचना दी, ताकि बाकी बीमार बंदरों को बचाया जा सके।
करीब 80 बंदर नाजुक हालत में मिले, समय रहते बचाई गई कई जानें
घटना की सूचना मिलते ही गांव के सरपंच और पशु चिकित्सक की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। वहां पहुंचकर जो स्थिति सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, ढाबे के आसपास करीब 80 बंदर अत्यंत नाजुक हालत में पाए गए। कई बंदर जमीन पर बैठे हुए थे, कुछ लगातार उल्टियां कर रहे थे, कुछ की हालत इतनी खराब थी कि वे उठ भी नहीं पा रहे थे। टीम ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया और बीमार बंदरों को सुरक्षित जगह पर ले जाने की कोशिश की। पशु चिकित्सकों ने मौके पर बंदरों की जांच की और उन्हें जरूरी दवाएं दीं, ताकि जहर के असर को कम किया जा सके। राहत की बात यह रही कि समय रहते कार्रवाई शुरू हो गई, जिससे कई बंदरों की जान बचाने में सफलता मिली। लेकिन जिस तरह से इतनी बड़ी संख्या में बंदर एक साथ बीमार पड़े और कई की मौत हो गई, उससे यह मामला बेहद गंभीर बन गया है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर हाईवे पर इस तरह की घटना कैसे हो सकती है, और अगर यह किसी की साजिश है तो उसका उद्देश्य क्या था।
जहरीला खाना खिलाने की आशंका, जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का शक
स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा जानबूझकर जहरीला पदार्थ खिलाया गया हो सकता है। गांव वालों को शक है कि किसी ने खाने में जहर मिलाकर या कोई जहरीला पदार्थ डालकर बंदरों को खिलाया, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई। बताया जा रहा है कि कुछ बंदर ढाबे के आसपास खाना ढूंढते रहते थे और कई बार ढाबे वालों या राहगीरों से खाने की चीजें भी ले लेते थे। ऐसे में किसी ने इसी कमजोरी का फायदा उठाकर उन्हें निशाना बनाया हो सकता है। घटना के बाद इलाके में गुस्सा भी है और डर भी। लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर इस तरह खुलेआम जानवरों को जहरीला खाना खिलाया जा सकता है, तो भविष्य में यह इंसानों के लिए भी खतरा बन सकता है। कई लोगों ने मांग की है कि इस मामले की गंभीर जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि जहरीला पदार्थ कहां से आया और किसने यह हरकत की। कुछ ग्रामीणों ने आशंका जताई कि हो सकता है बंदरों की बढ़ती संख्या से परेशान होकर किसी ने ऐसा कदम उठाया हो, लेकिन किसी भी हाल में यह क्रूरता और अपराध की श्रेणी में आता है। अब यह मामला केवल पशुओं की मौत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था से भी जुड़ गया है।
घटना के बाद लोगों में आक्रोश
घटना के बाद गांव के लोगों और पशु प्रेमियों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ अमानवीय हैं, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए भी बड़ा खतरा हैं। कई लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ढाबे और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जाए, ताकि संदिग्ध व्यक्ति की पहचान हो सके। साथ ही ढाबों और हाईवे किनारे खाने-पीने की जगहों पर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई जा रही है। पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने बीमार बंदरों का इलाज जारी रखने की बात कही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें बड़े सेंटर में भेजने की तैयारी भी की जा रही है। वहीं ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि मृत बंदरों का पोस्टमार्टम कराया जाए, ताकि मौत की असली वजह की पुष्टि हो सके और जहर की पहचान हो पाए। फिलहाल, इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। सवाल यही है कि आखिर 95 बंदरों को इस तरह जहरीला खाना देकर क्यों निशाना बनाया गया, और क्या दोषी पकड़ा जाएगा या मामला यूं ही दब जाएगा। अब सबकी निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
