India Declares 23 Terrorists: केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और सख्त करते हुए 23 लोगों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित कर दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इन सभी के नाम UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किए गए हैं। सरकार का कहना है कि ये सभी व्यक्ति लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और इनमें से कई पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से आतंकी नेटवर्क चला रहे हैं। इस फैसले के बाद सुरक्षा एजेंसियों को इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने में और अधिक आसानी होगी। सरकार ने दोहराया है कि देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
लश्कर और जैश से जुड़े कई नाम सूची में शामिल
गृह मंत्रालय की ओर से जारी सूची में ऐसे कई लोगों के नाम शामिल हैं, जिन पर भारत में हुए बड़े आतंकी हमलों से संबंध रखने के आरोप हैं। इनमें मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान और हाफिज अब्दुल शकूर जैसे नाम प्रमुख हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन पर नगरोटा सेना शिविर और जम्मू के सुंजवां क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर हुए आतंकी हमलों में भूमिका निभाने के आरोप हैं। इसके अलावा लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अब्दुल रऊफ और हाफिज खालिद वलीद का नाम भी इस सूची में शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि इन लोगों ने आतंकी संगठनों को मजबूत करने और भारत के खिलाफ साजिश रचने में अहम भूमिका निभाई है।
बेंगलुरु से पाकिस्तान तक, एक नाम बना चर्चा का विषय
इस सूची में शामिल मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ जाकिर का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। सरकारी जानकारी के अनुसार, उसका मूल निवास कर्नाटक के बेंगलुरु में है, लेकिन वह फिलहाल पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा और आईएसआईएस से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में रहा है। उस पर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने, आतंकी संगठनों के लिए भर्ती कराने, प्रशिक्षण की व्यवस्था करने और फंड जुटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं।
UAPA के तहत कार्रवाई होगी और प्रभावी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि UAPA की धारा 35 के तहत किसी व्यक्ति का नाम चौथी अनुसूची में शामिल होने के बाद उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दायरा और मजबूत हो जाता है। इससे जांच एजेंसियां उसकी संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामलों में अधिक प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर सकती हैं। गृह मंत्रालय ने कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर यह फैसला लिया गया है। अधिसूचना गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव की ओर से जारी की गई है। केंद्र सरकार ने दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति आगे भी जारी रहेगी और देश की सुरक्षा के लिए ऐसे सभी तत्वों पर सख्त कार्रवाई लगातार होती रहेगी।
