भारतीय क्रिकेट जगत में इस समय हलचल मची हुई है। बीसीसीआई (BCCI) ने आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए 15 सदस्यीय भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है, लेकिन इस घोषणा ने फैंस के साथ-साथ विशेषज्ञों को भी सन्न कर दिया है। टीम के नियमित उपकप्तान शुभमन गिल को वर्ल्ड कप स्क्वाड से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिल को इस बड़े फैसले की भनक तक नहीं थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, चयन समिति या टीम प्रबंधन की ओर से किसी ने भी उन्हें पहले से सूचित नहीं किया कि वह वर्ल्ड कप की योजना का हिस्सा नहीं हैं।
उपकप्तानी छिनी और टीम से भी हुए आउट
पिछले कुछ समय से शुभमन गिल को भारतीय टी20 टीम के भविष्य के कप्तान के रूप में देखा जा रहा था। उन्हें श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में उपकप्तान की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन जब वर्ल्ड कप की बारी आई, तो न केवल उनसे उपकप्तानी छीनी गई, बल्कि उन्हें 15 खिलाड़ियों की मुख्य टीम में जगह तक नहीं मिली। गिल की जगह अब अक्षर पटेल को टीम का नया उपकप्तान नियुक्त किया गया है। क्रिकेट के गलियारों में चर्चा है कि आखिर रातों-रात ऐसा क्या हुआ कि एक सेट खिलाड़ी और टीम के सीनियर सदस्य को इस तरह दरकिनार कर दिया गया।
मैनेजमेंट का ‘सीक्रेट’ प्लान और चौंकाने वाली वजह
चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गिल को ड्रॉप करने के पीछे ‘टीम कॉम्बिनेशन’ का हवाला दिया है। मैनेजमेंट का कहना है कि वे टॉप ऑर्डर में एक ऐसा विकेटकीपर बल्लेबाज चाहते थे जो आक्रामक शुरुआत दे सके। इसी रणनीति के तहत ईशान किशन की दो साल बाद वापसी हुई है और संजू सैमसन को भी बरकरार रखा गया है। हालांकि, पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही बयां करती है। सूत्रों के मुताबिक, गिल की टी20 में धीमी बल्लेबाजी शैली (स्ट्राइक रेट) चयनकर्ताओं की चिंता का सबब बनी हुई थी। मैनेजमेंट अब ‘फियरलेस क्रिकेट’ की राह पर चलना चाहता है, जिसमें गिल फिट नहीं बैठ रहे थे।
क्या गिल को अंधेरे में रखा गया?
सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि गिल को इस फैसले के बारे में किसी ने जानकारी नहीं दी। आमतौर पर जब किसी सीनियर खिलाड़ी या उपकप्तान को बाहर किया जाता है, तो चयनकर्ता या कोच उनसे व्यक्तिगत रूप से बात करते हैं। लेकिन गिल के मामले में ऐसा नहीं हुआ। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज तक वह टीम के साथ थे और अचानक वर्ल्ड कप टीम से उनका नाम गायब होना उनके लिए किसी झटके से कम नहीं था। टीम इंडिया के इस ‘साहसिक’ लेकिन विवादित फैसले ने यह साफ कर दिया है कि अब केवल नाम या पद के आधार पर टीम में जगह पक्की नहीं होगी।
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