अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) को लेकर हाल ही में खबर आई थी कि, वह कोरोना पॉजिटिव निकले हैं. पर अब खबरें मिल रही हैं कि मौत हो गई. दाऊद को कोरोना होने के बाद कराची के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पर उसकी मौत हुई है या नहीं इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है. पर दाऊद का मुद्दा उठते ही भारत में उसकी कहानियों की खूब चर्चा हो रही हैं. एक ऐसी ही कहानी है ऋषि कपूर से जुड़ी जिसे विरल भयानी ने इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया है. साथ ही उनकी तस्वीरें भी शेयर की हैं.

दरअसल, जिस कहानी को विरल भयानी ने शेयर किया है उसका जिक्र ऋषि कपूर (rishi kapoor) की आत्मकथा ‘खुल्लमखुल्ला’ में है. जिसमें ऋषि ने बताया कि उनकी और दाऊद की मुलाकात कैसे हुई थी. बात 1988 की है जब ऋषि अपने एक करीबी दोस्त, आर डी बर्मन व आशा भोंसले के कार्यक्रम में शामिल होने दुबई गए थे. ऋषि जैसे ही एयरपोर्ट पर पहुंचे तो एक शख्स ने फोन लाकर कहा कि दाऊद उनसे बात करेंगे. एक पल के लिए ऋषि चौंक गए पर जब उन्होंने बात की तो सच में दूसरी तरफ दाऊद ही था. इस पर दाऊद ने कहा कि, उन्हें जिस भी चीज की जरूरत हो वह उन्हें बेझिझक बता सकते हैं. फिर उन्होंने ऋषि को अपने घर चाय के लिए बुलाया क्योंकि, वह शराब नहीं पीता था.

जब ऋषि गए दाऊद के घर
दाऊद के बुलाने पर ऋषि उनके घर गए और खुद दाऊद ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया. दोनों की चाय पर मुलाकात करीब 4 घंटे तक चली और खूब बातें भी हुई. उसी वक्त दाऊद ने बताया कि, ‘तवायफ’ फिल्म उसे खूब अच्छी लगी क्योंकि, उस फिल्म में ऋषि का नाम दाऊद ही था.

दाऊद ने किए खुलासे
मुलाकात में दाऊद ने अपने बारे में कई बड़े खुलासे किए उसने ऋषि से कहा कि, वह छोटी-मोटी चोरियां कर चुका है पर किसी को जान से मारा नहीं लेकिन मरवाया है. इस घटना का जिक्र ऋषि ने अपनी किताब में किया था और लिखा था मुलाकात 1993 में हुए बम ब्लास्ट से पहले हुई थी और उस समय वह दाऊद को भगोड़ा नहीं मानते थे.

नीतू कपूर के साथ हुई दूसरी मुलाकात
पहली मुलाकात के बाद शायद ही ऋषि ने सोचा होगा कि उनकी दोबारा से दाऊद से मुलाकात होगी. पर दूसरी मुलाकात के बारे में “खुल्लमखुल्ला” में जिक्र किया. साल 1989 की बात है जब ऋषि अपनी पत्नी नीतू के साथ दुबई के एक लेबनीज स्टोर में वो जूते खरीदने गए थे. rishikapoor-dawoodibrahim-storyउस समय वहां दाऊद भी था जिसके बारे में उन्हें पहले से पता नहीं था. लेकिन वहां दाऊद के साथ 8 बॉडीगार्ड्स और हाथ में मोबाइल फोन भी था. ऋषि को देखते ही दाऊद ने उन्हें कुछ भी खरीदने के लिए कहा. पर ऋषि ने मना कर दिया तो दाऊद अपना मोबाइल नंबर उन्हें देकर चलते बना. ऋषि नहीं दे पाए क्योंकि, उस समय तक भारत में मोबाइल फोन नहीं थे.

मुलाकात पर हुआ बड़ा विवाद
ऋषि ने अपनी आत्मकथा में दाऊद की तारीफ करते हुए लिखा, “वो मेरे लिए हमेशा बेहतर इंसान रहा. पर मुझे हमेशा उसके भारत के प्रति दृष्टिकोण को लेकर कंफ्यूजन रही. पर मुलाकात के बाद सब बदलने लगा था और फिर ना तो मेरी उससे कभी मुलाकात नहीं हुई और ना ही बात.” पर ऋषि की किताब जब पब्लिश हुई तो विवाद खड़ा हो गया. उनसे सवाल हुए कि आखिर वो लंबे समय तक चुप क्यों रहे. उन्होंने दाऊद के साथ हुई मुलाकात के बारे में पुलिस या एजेंसियों को क्यों नहीं बताया. पर ऋषि के मन में ऐसा कुछ नहीं था शायद इसलिए वह चुप थे.

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