Friday, December 3, 2021

देव दीपावाली का अद्भूत दृश्य, लाखों दीये और जगमग रोशनी से खिलखिलाये काशी के घाट

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वाराणसी। तीनो लोकों से न्यारी भगवान शिव की नगरी काशी शुक्रवार को एक बार फिर जगमगाते दीपों से खिलाखिलाती नजर आयी। राजघाट पर उद्घाटन का औपचारिक दीया जलने से पहले ही सभी 84 गंगा घाटों पर अलौकिक छठा से नही उठी। गंगा पार रेती पर भी दीयों ने लोगों को आकर्षित किया। पहली बार लोगों ने जल और थल के साथ ही नभ से भी आकर्षक नजारों का दीदार देखने को मिला। गंगा घाटों की सीढ़ियों और नाव के साथ ही रंग बिरंगे गुब्बारों (हॉट एयर बैलून) से इस बार देव दीपावली देखने का लोगों ने आनंद उठाया। गंगा उस पार डोमरी से उड़ाए गए हाॅट एयर बैलून से घाटों की अद्भुत छठा दिखाई दी। अपनी आंखों से अनूठे उत्सव का नाजारा लेने के लिए लाखों लोग गंगा घाटों पर रहे।

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 Ganga aarti

सूर्य अस्त होते ही माटी के दीपों में तेल की धार बह चली और रुई की बाती तर होते ही प्रकाशित होने को आतुर नजर आई। गोधूलि बेला के साथ ही एक-एक कर दीपों की अनगिनत श्रृंखला पूर्णिमा के चांद की चांदनी को चुनौती देने के लिए बेकरार हो चली। दीपों की अनगिन कतारों से घाटों की अर्धचंद्राकार श्रृंखला दिन ढलते ही नहा उठी। मुख्य घाट पर आयोजन में शामिल उजाला मानो चंद्रहार में लॉकेट की भांति नदी के दूसरे छोर से प्रकाशित नजर आने लगा। पचगंगा घाट पर हजारा (हजार दीपों) और शिवाला घाट पर लेजर शो के आयोजन ने देव दीपावली को और आकर्षक बना दिया। अस्सी घाट के सामने इलेक्ट्रानिक आतिशाबाजी का भी इस बार लोगों को नजारा देखने को मिला। इस दौरान दर्जनों घाटों पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी लोगों का मन मोहा। शहर के विभिन्न सरकारी संस्थानों, भवनों व बिजली पोल को भी इस दौरान तिरंगे रंग के झालरों से सजा रहा है।

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कई हस्तियां पहुंची बनारस

गंगा तट पर अलौकिक छटा देखने के लिए देश के तमाम हिस्सों के हजारों लोग शहर में दो दिन पहले से ही डेरा डाल चुके थे। केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राजघाट पर देव दीपावली महोत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र, उमा भारती आदि साक्षी बनीं। दक्षिण भारत से आए भक्तों ने तामिलनाडु के ओंकार आश्रम के महाधिपति स्वामी ओंकारानंद के सानिध्य में शिवाला घाट पर गंगा पूजन के साथ पूर्णिमा अनुष्ठान का श्रीगणेश किया। भक्तों ने दक्षिण भारतीय पद्धति से गंगा पूजन किया। स्वामी ओंकारानंद ने बताया कि काशी में 20वां आयोजन संन्यासिनी प्रवणकुमारी (लक्ष्मी बाई) की पुण्य स्मृति को समर्पित है। प्रखर साधिका लक्ष्मी बाई गुप्त रूप से मानस सेवा करती रही हैं।

वरुणा घाट भी हुए रोशन

काशी की दूसरी प्रमुख वरुणा नदी के तट पर स्थिति रामेश्वर और शास्त्री घाट भी दिन ढलने के साथ ही दीपों और रोशनी से नहा उठे। गंगा घाट पर ही इस बार 15 लाख दीपक जलाने का दावा किया जा रहा है। अगर वरुणा और अन्य स्थानों पर जले दीपकों को जोड़ लें तो यह आंकड़ा कहीं अधिक हो जाएगा।

अनुपम छटा देखने उमड़ा जनसमूह

लाखों लोगों के कदम घाटों की ओर ऐसे बढ़ चले मानो मां गंगा की अनुपम और अनोखी छवि को लंबे समय के लिए लोग नजरों में कैद कर लेने को व्याकुल हों। गंगा तट के दूसरे किनारे पर भी गंगा की रेती में आस्था की मानो खेती ऐसी नजर आई कि इस छोर के बाद उस छोर पर भी तारे जमीन पर उतर आए हों।

दीपों से काशी हुई गुलजार

भगवान शिव को समर्पित इस विशिष्ट आयोजन में काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा अंचलों में मारकंडेय महादेव, तिलभांडेश्वर महादेव, सारंगनाथ महादेव, बीएचयू स्थित विश्वनाथ मंदिर और दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में भी शाम होते ही असंख्य दीपों की लड़ियों ने प्रकाश पर्व के आयोजन को और गति दी।

आकर्षण का केंद्र रही अन्नपूर्णा की प्रतिकृति

कनाडा से लगभग 108 साल बाद काशी लाई गई मां अन्नपूर्णा की प्रतिकृति मानसरोवर घाट पर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। देव दीपावली पर इस प्रतिकृति को प्रदर्शित करने की परिकल्पना धनावती देवी ने की। वह इस तरह के प्रेरक कार्य में हमेशा से रुचि दिखाती रही हैं।

पंचगंगा घाट पर पांच धाराएं पूजित हुईं

पौराणिक देव दीपावली की जनक एवं विस्तारभूमि पंचगंगा पर परम्परानुसार गोधूलिबेला में श्रीमठ स्थित महारानी अहिल्याबाई की ओर से स्थापित ऐतिहासिक हजारा दीपस्तम्भ का जगद्गुरु रामानंदाचार्य रामनरेशचार्य विधिवत पूजन किया। उनके हजारा दीपस्तम्भ के दीपक जलाने के साथ ही काशी के 84 पक्के घाटों पर दीपप्रज्जवलन शुरू हो जाएगा। श्रीमठ की ओर से अन्य सात हजारा दीपस्तंभ भी प्रज्वलित किए गए। पांच ब्राह्मणों ने इस दौरान पंचगंगा की महाआरती की। पंचगंगा में गंगा, यमुना, सरस्वती, किरणा और धूतपापा नदियां शामिल हैं। पूजन के बाद पूर्वांचल के विशिष्ट गायकों का भजनगान भी शुरू हुआ।

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