Friday, December 3, 2021

तीनों कृषि कानूनों की वापसी और MODI की माफी से बदलेगा चुनावी समीकरण, विपक्ष कर रहा ऐसे दावे

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को देखते हुए सियासी समीकरण पर मतदाताओं का कसा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माफी मांगने के साथ ही तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया है। इस ऐलान के बाद भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष के वोट गणित पर सभी की नजर है। बीजेपी के लिए चुनावी दृष्टि से पंजाब से कहीं ज्यादा मुश्किल उत्तर प्रदेश है। यूपी चुनाव के ऐलान से पहले प्रधानमंत्री का यह फैसला चुनाव के नजरिये से बड़ा निर्णय है। पीएम मोदी के इस बड़े ऐलान के बाद बीजेपी को लगता है कि अब वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों और खासकर जाटों की नाराजगी को कम कर सकेगी। चुनाव में इस निर्णय का लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री के कानून वापसी के फैसले के बाद से किसानों में खुशी की लहर है, पटाखे फूट रहे हैं और किसानों के बीच मिठाइयां बंट रही हैं। विपक्ष हमलावर जरूर है लेकिन उसके तरकश में और भी तीर हैं। अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री के ऐलान के बाद एक नया नारा दिया ‘‘साफ नहीं है इनका दिल, चुनाव के बाद फिर लाएंगे यह बिल। उन्होंने प्रेसवार्ता में कहा है कि जनता मााफ नहीं करेगी बल्कि साफ कर देगी। 2022 के चुनाव के पहले उत्तर प्रदेश के लिए इससे बड़ा कोई फैसला नहीं हो सकता था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों और जाटों की नाराजगी के अलावा यह आंदोलन तराई में फैल चुका था। तराई में किसानों पर केन्द्रीय गृहराज्य मंत्री को लेकर काफी नाराजगी हैं। लखीमपुर में किसान उपर चढ़ाई गाड़ी से किसानों के बीच नाराजगी उपजी थी जो चुनाव में दिखेगा।

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बीजेपी अब खुलकर चुनावी पिच पर खेलेगी

प्रधानमंत्री की माफी के साथ कानून वापसी के फैसले ने बीजेपी चुनाव में इसी के साथ आयेगी। बीजेपी के नेता, कार्यकर्ता जाट बाहुल्य गांवों में घुसने से डर रहे थे। अब पार्टी नए जोश के साथ पश्चिमी यूपी में जाटों को साधने की कोशिश में जुट जाएगी। प्रधानमंत्री ने तीनों कानूनों को वापस लिया, उसके पहले अमित शाह को पश्चिम का प्रभारी बनाया गया है। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव का समीकरण बदलेगा।

बीजेपी और समाजवादी पार्टी के जाट नेता

बीजेपी के जाट चेहरे और योगी सरकार में मंत्री भूपेंद्र कहते हैं कि जाटों का एक बड़ा तबका पहले से ही बीजेपी के साथ था। कृषि कानूनों के बावजूद वह लोग जाट बिरादरी को समझाने में सफल थे। प्रधानमंत्री के फैसले का लाभ मिलेगा। समाजवादी पार्टी के जाट चेहरे संजय लाठर का मानना है कि प्रधानमंत्री ने तीनों कानूनों को वापस लेकर सेल्फ गोल कर लिया है। जाट और किसान अपमान और तकलीफों को नहीं भूलेंगे बल्कि इसका बदला लेंगे।

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