Friday, December 3, 2021

विकास दुबे की दरियादिली के मुरीद थे गांववाले..इसलिए 60 मुकदमे झेलने के बाद भी सभी ठोकते थे सलामी 

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विकास दुबे..देश के सबसे सूबों की फेहरिस्त में शुमार उत्तर प्रदेश के कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र में अभी इस नाम की चर्चा अपने चरम पर है। इसे महज एक नाम कहना मुनासिब न होगा.. यह महज एक नाम नही अपितु यह अपने आप में एक आतंक का पर्याय है..दहशत की खुली किताब का नाम है विकास दुबे..खौफ की खौफनाक इबारत है..विकास दुबे..60-60 मुकदमों को अपना हमसफर बनाने वाला विकास दुबे जब अपने गांव की सरजमीं पर दस्तक दिया करता था तो अदब से हर मस्तक झुक जाया करते थे। हर जुबां यह इकबाल करती की दुबे साहब.. आप ही हो हमारे सबकुछ हो.. आखिर अब सवाल है.. यहां पर..वो भी बेशुमार कि आखिर आतंक का पर्याय बने दुबे को लोग इतनी इज्जत क्यों देते थे। आखिर क्या थी? इसके पीछे की असल कहानी।

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इतना ही नहीं, बताते तो लोग यहां तक है कि जब देश की अदालतों में किसी को इंसाफ नहीं मिलता तो लोग विकास दुबे की चौखट पर दस्तक देते और वो जो अपने फरमान सुना देता.. तो वो फिर महज एक फरमान नहीं बल्कि पत्थऱ पर लिखी इबारत हुआ करती थी, जो यूं समझिए कि अमिट थी। जिसे मिटाने का माद्दा किसी में न होता। गांव में बड़ी इज्जत थी दूबे की। बताते हैं कि जब वो चलता तो अकेला नहीं बल्कि एक काफिला उसके संग रहता।  गांव के लोग भी उसे बड़ा मानते थे और उसका रवैया भी गांव के प्रति बहुत नरम रहा करता था।

बताया जाता है कि इलाके के लोग उसे पंडित जी कहकर संबोधित किया करते थे। वो इसी नाम से ही पूरे गांव में विख्यात था। उसके संगी साथी भी उसे इसी नाम से संबोधित किया करते थे। हर छोटी बड़ी घटनाओं को लेकर दूरी बनाए रखने वाले दुबे ने कभी अपने गांव से दुरी नहीं बनाई थी। हर जगह उसका मुखबिर तंत्र इतना सबल था कि हर खबर उसे बिल्कुल समय पर मिल जाया करती थी, जिससे उसका हर काम सुगम हो जाया करता था। बताया जाता है कि इतना खूंखार होने के बावूजद भी उसका व्यवहार गांव के लोगों के प्रति नरम हुआ करता था। बताया जाता है कि जब वो गांव आता था तो छुछे हाथ नहीं बल्कि गांव के बच्चों के लिए कुछ न कुछ लेकर ही आया करता था, इसलिए लोग उसके इतने मुरीद थे। 2001 में भाजपा के मंत्री संतोष शुक्ला की जेल में घुसकर हत्या की थी। इसके बाद उसमें भी वो दोषमुक्त होकर रिहा हो गया।

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