‘रात को आकर गांव वालों से बदला लेता है विकास दुबे का भूत’, कहता है- ‘कोई भी नहीं बचेगा क्योंकि..

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विकास दुबे का खौफ अब एक सिलसिला बन चुका है। यह सिलसिला फिलहाल तो थमने का नाम नहीं ले रहा है। लेकिन इसके अंजाम जरूर उभरकर सामने आ रहे हैं। जिस गांव से विकास दुबे का पुराना नाता रहा है। वहां पर अभी-भी लोग उससे खौफ खा रहे हैं। अब यहां हैरान करने वाली बात तो यह है कि जो विकास दुबे बीते दिनों पुलिस एनकाउंटर में गोलियों का शिकार हो चुका था। आखिर अब उससे खौफ खाने का क्या औचित्य रह जाता है। आखिर क्या है। इसके पीछे की वो खौफनाक कहानी, जिसके चलते अभी-भी लोग उससे खौफ खा रहे हैं। यहां पर हम आपको वो कहानी बताएंगे लेकिन इससे पहले हम आपको बताते चेल कि विकास दुबे के कहर से गांव वाले किस कदर त्रस्त हो चुके हैं। लोग विकास दुबे के खौफ से किस कदर खौफ जदा हो चुके हैं।

विकास दुबे का गांव रहा बिकरू.. अब यहां पर अब लोगों का जीना मुहाल हो चुका है। लोगों को विकास दुबे का खौफ तो नहीं लेकिन उसकी आत्मा का खौफ जरूर सता रहा है। अब लोगों को विकास का नहीं बल्कि उसके भूत का खौफ सता रहा है। गांव वालों का कहना है कि यहां पर रात में बदमाशों की आत्माएं घूमती रहती है। जिसमें विकास दुबे की आत्माएं भी होती हैं। कहता है कि सबसे बदला लूंगा। रात में पेड़ का एक पत्ता भी हिल जाए तो यूं समझिए की पूरा दिल सिहर जाता है। गांव वाले बताते हैं कि विकास के साथ जितने भी बदमाश मारे गए उनमे से किसी का भी कोई क्रियाक्रम नहीं किया गया, जिसके चलते यहां पर भूत के पेहरे का डर 24 घंटे सताता रहता है।

भले ही विकास दुबे अब नहीं हो मगर उसकी दहश्त का अंदाजा आप महज इसी से लगा सकते हैं कि लोग अभी-भी उसकी रूह से खौफ खा रहे हैं। भले ही विकास दुबे का वजूद अब खत्म हो चुका हो, मगर अभी उसके गांव में खौफ का सिलसिला जारी है। इसे लेकर गांव के कुछ बुजुर्गों का कहना है कि विकास दुबे मारा गया है, उसका कर्मकांड नहीं किया गया। उसके साथ दूसरे कई बदमाश भी मारे गए। उन लोगों का भी कर्मकांड नहीं किया गया है। ऐसे में तो लाजिमी है कि उनकी आत्माएं भटकेंगी। इसलिए जैसे ही दिन ढलता है तो सारे लोग अपने-अपने घरों की ओर रवाना हो जाते हैं। किसी की हिम्मत नहींं होती है कि कोई विकास दुबे की गली  मोहल्ले की ओर ताक ले। विकास दुबे के खंडहर हो चुके मकान में अब पक्षियों का बसेरा शुरू हो चुका है। ये भी पढ़े :बड़ी मेहरबानी होगी साहब, हमें बचा लीजिए, विकास दुबे तो मर गया है, लेकिन..