बिकरू का कांड..नहीं था एक दिन का प्लान, लगे थे पूरे इतने दिन, कई खाकीवर्दियों ने निभाया था साथ  

222

नहीं, अभी-भी खत्म नहीं हुई है। उस विकास दुबे की कहानी जिसके नाम से कभी सूबे का इंसान तो क्या पत्ता भी खौफ खाता था। उसके खौफ के कारोबार का लेखा जोखा करने में पुलिस सहित अन्य जांच एजेंसियां जुट चुकी है।उधर, अब इसी बीच इस पूरे मामले को लेकर एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने सभी के होश ही फाख्ता कर दिए हैं।बता दें कि वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने बिकुरू मामले की तफ्तीश करने हेतु सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग के सामने इस हैरतअंगेज तथ्य का खुलासा किया है। इस मामले से जुड़े कुछ ऑडियो-वीडियो भी आयोग को सौंपे हैं, जो इस मामले में अहम सुबूत के रूप में उभकर सामने आ सकते हैं।

 श्पथपत्र में क्या कहा गया?
यहां पर हम आपको बताते चले कि वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने शपथपत्र में कहा कि जांच में फंसे में डीआईजी व पुलिस अधिकारियों तथा जय बाजपेई का नार्को ब्रेन मैपिंग, लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की बात कही गई है। सौरभ में  निराल दुबे की संपत्तियां सहित उसके खंजाची रहे जय वाजपेयी की संपत्तियों का ब्योरा सौंपने की बात कही है।

हुए कई हैरतअंगेज खुलासे 
इसके साथ ही पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में कई बड़े खुलासे भी हुए हैं, जिसमें कहा गया है कि आठ पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारने के बाद विकास दुबे के खास रहे रमा सिंह ने केके शर्मा को फोन किया था। फोन करके उसने पुलिस की तमाम ताजा कार्रवाई की जानकारी ली। दरोगा से बात करने के बाद मोबाइल को बंद कर लिया गया। पुलिस तफ्तीश में सीडीआर से पता चला है कि दो जुलाई को शाम चार बजे सबसे पहले आरोपी दरोगा केके शर्मा की  विकास दुबे से बात हुई थी। फिर रात करीब 11 बजे केके शर्मा ने राम सिंह को कॉल की। इस बीच एक कॉल थाने के मुंशी ने आरोपी हीरू दुबे को की। फिर विकास पर एफआईआर दर्ज होने के बाद रात 12:11 मिनट पर विकास की सिपाही राजीव से बातचीत हुई। पुलिस जांच में हुए खुलासे से यह साफ जाहिर हो रहा है कि इस पूरे  कांड में पूरा पुलिस का कुनबा शामिल रहा था। ये भी पढ़े :बिकरू कांड में बड़ा खुलासा, अमर की पत्नी खुशी के झूठ का पर्दाफाश, पुलिस ने लिया एक्शन