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लखनऊ। अपराध से सत्ता को हमेशा चुनौती मिलती रही है। अपराधी सत्ता पर अपनी खौफ जमाने की कोशिश करते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ ही ऐसा ही हुआ था जब उत्तर प्रदेश और बिहार में आतंक का पर्याय बन चुके कुख्यात माफिया सरगना श्रीप्रकाश शुक्ला ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को मारने की सुपारी छह करोड़ में ली थी। यह वह दौर था जब गोरखपुर के श्रीप्रकाश शुक्ला से अपराधी ही नहीं, पुलिस भी खौफ खाती थी। उसका आतंक बहुत ज्यादा था। मुख्यमंत्री की सुपारी लेने के बाद यूपी में पहली बार एसटीएफ का गठन हुआ और 22 सितंबर 1998 को एसटीएफ ने इस अपराध के डॉन को मुठभेड़ में मार गिराया। बिहार सरकार के मंत्री बृज बिहारी प्रसाद को श्रीप्रकाश ने 13 जून 1998 को पटना स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल के बाहर उनके सुरक्षाकर्मियों के सामने ही गोलियों से भून दिया था। इस हत्या में श्रीप्रकाष ने एके-47 राइफल का प्रयोग किया था। एके-47 का अपराध की दुनिया में आने से सनसनी फैल गई थी।

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इसके पहले उसने 1997 में बाहुबली विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही को लखनऊ में दिनदहाड़े मौत के घाट उतार दिया था। महाराजगंज के लक्ष्मीपुर के विधायक वीरेंद्र शाही की उन दिनों तूती बोलती थी। इस मर्डर के बाद श्रीप्रकाश के नाम अपराध की दुनिया में और तेजी से चलने लगा। श्रीप्रकाश ने अपनी हिट लिस्ट में दूसरा नाम रखा कल्याण सरकार में कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी का, पर नाकाम रहा। बिहार के मंत्री बृजबिहारी के कत्ल का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि ऐसी खबर सामने आई कि श्रीप्रकाश शुक्ला ने उत्तर प्रदेष के तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह की सुपारी ले ली। यह सुपारी करीब छह करोड़ रुपये में तय हुई थी। इस सुपारी की बात आते ने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मच गया। सारी सरकारी मशीनरी के निशाने पर श्रीप्रकाश शुक्ला आ गया। इस अपराधी के खात्मे के लिए सघनता से तलाश होने लगी। इसके बाद यूपी पुलिस के तत्कालीन एडीजी अजयराज शर्मा ने इसके बाद 4 मई 1998 को राज्य पुलिस के बेहतरीन 50 जवानों को चुनकर स्पेशल टास्क फोर्स बनाई। इस फोर्स का एकमात्र उद्देश्य था, श्रीप्रकाश शुक्ला को जिंदा या मुर्दा पकड़ना।

22 सितंबर 1998 को एसटीएफ के प्रभारी अरुण कुमार को सूचना मिली कि श्रीप्रकाश दिल्ली से गाजियाबाद की तरफ आ रहा है। जैसे श्रीप्रकाश की कार इंदिरापुरम के सुनसान इलाके में दाखिल हुई, एसटीएफ ने उसे घेर लिया। श्रीप्रकाश शुक्ला को सरेंडर करने को कहा गया लेकिन वह नहीं माना और फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में श्रीप्रकाश मारा गया और अपराधी की दुनिया का अंत हो गया। श्रीप्रकाश का खौफ इस कदर था कि सदन में खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने श्रीप्रकाश शुक्ला के मारे जाने की खबर की पुष्टि की। ज्ञात हो कि डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला का जन्म गोरखपुर के बड़हलगंज के ममखोर गांव में हुआ था। वह शहर के दाउदपुर मोहल्ले में रहता था। तीन भाइयों में सबसे छोटा श्रीप्रकाश बचपन से ही मनबढ़ था।

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