मंदिर समझकर शौचालय की सालों से पूजा कर रहे थे गांववाले, वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

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KESARIA SAUCHALAYA

देश-दुनिया से कई बार ऐसी खबरें सामने आती हैं जिसे पढ़ने और सुनने के बाद हम आपने आपको हंसने या फिर उस पर कमेंट करने से रोक नहीं पाते. दरअसल हाल ही में एक ऐसी ही खबर उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से सामने आई है. जहां पर केसरियां रंग के शौचालय को लोग मंदिर समझकर उसकी पूजा करते थे.

बता दें कि ये अजीबों-गरीब खबर सुनने के बाद जितनी हैरानी आपको हो रही है, उतनी ही हैरानी हमें भी हो रही है. लेकिन यहां सवाह ये उठ रहा है कि क्या लोगों को इतने दिनों से ये पता ही नहीं चला कि जिस भवन को वो मंदिर मानकर पूज रहे हैं, वो एक शौचालय है…?

दरअसल ये चौंकाने वाला खुलासा हमीरपुर जिले से हुआ है. जहां पर एक केसरिया रंग में रंगी बंद शौचालय को लोग भगवान का मंदिर मानकर पूजते थे. यहां पर सबसे ज्यादा अचंभित करने वाली बात तो ये है कि पूजा करने वालों में से किसी को इस बात का अंदाजा तक भी नहीं था कि जिसकी वो रोज पूजा-अर्चना कर रहे हैं, असल में वो कोई मंदिर नहीं बल्कि शौचायल है.

बता दें कि इस बात की जानकारी देते हुए इसी गांव के एक निवासी राकेश चंदेल ने बताया कि, ‘यह भवन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में स्थित है. जो केसरिया रंग में रंगने के साथ ही मंदिर के आकार का बनाया गया था. यही कारण है कि लोग इसे मंदिर मानने लगे थे, लेकिन कभी भी किसी ने ये जानने की कोशिश नहीं की कि असल में ये क्या है. राकेश ने आगे कहा कि हाल ही में हमें एक अधिकारी से जानकारी मिली कि भवन वास्तव में एक शौचालय है.’

भगवा रंग बना अंधविश्वास का कारण
इस बारे में जानकारी मिली कि शौचालय का भगवा रंग ही लोगों के भ्रम का कारण बन गया. हालांकि अब इसे गुलाबी रंग में रंग दिया गया है. बताया जा रहा है कि इस शौचायल का उद्धाघटन सालभर पहले ही कर दिया गया था. लेकिन इस पर सालभर से ताला ही लगा रहा. इस बारे में मौदहा नगर पंचायत के अध्यक्ष राम किशोर ने कहा कि, ‘यह सार्वजनिक शौचालय करीब एक साल पहले नगर पालिका परिषद ने बनवाया था और ठेकेदार ने इसे भगवा रंग में रंग दिया था. जिसका कारण ये है कि लोग इसे मंदिर समझ बैठे थे.’ हालांकि इस शौचालय का रंग अब बदल दिया गया है, लेकिन अभि भी इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. यहां तक कि अभी बड़े अधिकारी इस मामले को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाने में लगे हुए हैं.ये भी पढ़ें उत्तर प्रदेश की इस मंदिर में आज भी होती है रावण की पूजा, साल में सिर्फ एक ही बार खुलता है मंदिर का कपाट

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