Friday, December 3, 2021

शिवपाल की बातों में छलका उपेक्षा का दर्द, अखिलेश के सामने रखी ये शर्त

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लखनऊ /सैफई। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन के मौके पर उनके भाई प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रमुख शिवपाल सिंह यादव ने भतीजे अखिलेश के नेतृत्व वाली सपा में अपनी पार्टी के विलय का साफ संकेत दिया है। यादव परिवार के गढ़ सैफई में उनका दर्द छलक गया। पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत में कहा कि शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी में अपनी पार्टी प्रसपा का विलय करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना से भी कतई इनकार नहीं है और एक हफ्ते के अंदर अपने लोगों से राय लेकर इस पर फैसला करेंगे। इस दौरान शिवपाल यादव ने हालांकि अखिलेश यादव के सामने एक शर्त भी रखी है। उन्होंने साफ किया कि वह उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अपने समर्थकों के लिए 100 टिकटें चाहते हैं। शिवपाल यादव ने कहा कि हमने तो 2019 में ही कहा था कि चलो हम ही झुक जाएंगे। आज दो साल हो गए लेकिन कोई बात बनी नहीं बनी। उन्होंने कहा कि तय तो अखिलेश को करना है।

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समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन के मौके पर सैफई के मास्टर चंदगीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम में दंगल से पहले शिवपाल यादव के संबोधन में उपेक्षा का दर्द भी छलका। शिवपाल सिंह ने कहा कि आज यहां पर तेजप्रताप और अंशुल को भी होना चाहिए था। अंशुल को हराने के लिए कितनी ताकतें लगी थीं। हमारी ताकत पर अंशुल निर्विरोध चुन लिए गये।उन्हीं की तरफ से 22 तारीख को दंगल की बात चली थी लेकिन वह यहां नहीं आये। शिवपाल सिंह ने कहा कि हमने सोचा था कि यह दंगल ऐतिहासिक दंगल होगा लेकिन नहीं हुआ। हमने हमेशा त्याग किया है। हम चाहते तो 2003 में मुख्यमंत्री बन सकते थे लेकिन मैंने नेता जी को दिल्ली से बुलाकर सीएम बनाया था।

नहीं दे पाये एकता का बर्थडे गिफ्ट

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन के मौके पर सपा की ओर से उन्हें एकता का गिफ्ट दिए जाने की उम्मीद थी। अखिलेश और शिववाल में दूरियां बनी रहीं। शिवपाल नहीं आ सके। नेताजी के जन्मदिन के मौके पर बेटे अखिलेश यादव और उनके भाई शिवपाल सिंह यादव के साथ आने की बातें हो रही थीं लेकिन ऐसा नहीं हो सका। एक तरफ अखिलेश यादव लखनऊ स्थित पार्टी के मुख्यालय पहुंचे और मुलायम सिंह यादव का आशीर्वाद लिया तो वहीं शिवपाल यादव राजधानी से दूर गांव में दिखे। शिवपाल ने सैफई में केक काटकर मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन मनाया है। लखनऊ में अखिलेश यादव के अलावा उनके एक और चाचा रामगोपाल यादव भी मुलायम सिंह यादव का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया।  ज्ञात हो कि शिवपाल यादव कई बार दोहरा चुके हैं कि वे समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं और किसी भी समझौते के लिए तैयार हैं। अखिलेश यादव भी एक बार कह चुके हैं कि चाचा शिवपाल यादव और उनके समर्थकों का पार्टी में पूरा सम्मान किया जाएगा। ऐसे में यह उम्मीद थी कि चाचा और भतीजा के बीच कोई समझौता हो सकता है।

समझौते में क्यों देरी कर रहे हैं अखिलेश

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक अखिलेश यादव ने 2017 और 2019 के चुनावों में शिवपाल यादव की ताकत को भांप चुके हैं। शिवपाल ज्यादा असर छोड़ने में कामयाब नहीं रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव जानते हैं कि शिवपाल यादव की राजनीतिक ताकत सपा के बिना बेहद कम है। अखिलेश यादव विलय की स्थिति में भी शिवपाल के समर्थकों को ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं है। अखिलेश यादव की रणनीति है कि शिवपाल यादव को अपनी ही शर्तों पर साथ आये ताकि ज्यादा कुछ देना न पड़े।

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