Tuesday, January 31, 2023

उत्तर प्रदेश के इस शहर की नालियां उगल रही है सोना, हर रोज तलाशने वालों की लगी रहती हजारों लोगों की भीड़

उत्तर प्रदेश में एक ऐसा शहर है जहां पर नालियों के कीचड़ से सोना निकल रहा है और हर रोज इस सोने की तलाश में लोग कचरा निकालते हैं। जहां से सोना निकालने पर उसे बेच कर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। कुछ लोग यह काम करीब 45 साल से कर रहे हैं।

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UP News: आप लोगों ने सोने को दुकान पर तो खरीदते देखा ही होगा लेकिन क्या आप लोगों ने कभी भी सोने को नालियों में बहते हुए देखा है। लेकिन ऐसा होता है यूपी के गोरखपुर में कुछ ऐसे इलाके हैं जहां पर नालियां सोना उगल रहीं है। सोने की तलाश में हजारों लोगों की भीड़ लगी रहती है। जिससे तकरीबन 100 परिवारों की आजीविका चल रही है। UP New उत्तर प्रदेश में एक ऐसा शहर है जहां पर नालियों के कीचड़ से सोना निकल रहा है और हर रोज इस सोने की तलाश में लोग कचरा निकालते हैं। जहां से सोना निकालने पर उसे बेच कर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। कुछ लोग यह काम करीब 45 साल से कर रहे हैं।

यूपी के इस शहर की नालियों में बह रहा सोना

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आपको बता दें उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के घंटाघर स्थित सोनारपट्टी में जेवरात की कारीगरी करने वाले की सैकड़ों दुकानें हैं। जहां पर कारीगरी करते वक्त अक्सर सोने के छोटे-छोटे कण छिटकने पर कचरे में चले जाते हैं और वह नालियों में बह जाते हैं। इतना ही नहीं काम करते वक्त औजार मे भी सोने के कण उसमें चिपक कर रह जाते हैं और जब UP News धुलाई होती है तो उसी के कण एसिड में मिल जाते हैं और फिर एसिड फेंक दिया जाता है। जिसके बाद लोग नालियों से कीचड़ निकालते हैं फिर उसे तसले में भरकर नाली के पानी से साफ करते रहते हैं। जिसके बाद घंटों तक उस कीचड़ को छाना जाता है कड़ी मशक्कत के बाद बचे हुए कचरे को तेजाब और पारे में गला दिया जाता है। जिसके बाद इसे दुकानदार को भेज दिया जाता है।

नदियों से भी निकालता हैं सोना

इतना ही नहीं कुछ लोग नदियों से भी कीचड़ निकालकर सोना निकालते हैं। कहा जाता है कि शमशान में जब मृत शरीर को जलाया जाता है तो ज्यादातर महिलाएं हो के आभूषण नहीं निकाले जाते हैं। वहीं जब औरतों की अस्थियों को नदियों में विसर्जन किया जाता है तो वही सोना नदियों में रह जाता है। जिसे सैकड़ों महिलाएं इसे निकाल ले जाती हैं। कुछ लोग तो ऐसा 45 साल से कर रहे हैं। ज्यादातर यह कार्य महिलाएं ही करती हैं। आपको बता दें पहले नागपुर ,झांसी आदि के UP Newsबंजारे ऐसा काम करते थे लेकिन अब डोम जाति के लोग भी ऐसा करने लगे हैं। एक रजिया ने बताया कि इस काम को 40 साल से कर रहे हैं मेरे पति भी दिव्यांग है परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है इसी के जरिए हम लोग अपना पेट पाल रहे हैं। वही गोपाल ने बताया कि 15 साल से यह कार्य कर रहे हैं और 3-4 घंटे मेहनत करने के बाद अच्छी खासी कमाई हो जाती है।

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