सिपाही की निर्मम हत्या करने वाला यह आरोपी मुठभेड़ में हुआ ढेर,1 लाख का था इनाम

Kasganj

यूपी(UP) के कासगंज(Kasganj) में हुए सिपाही देवेंद्र हत्याकांड के मुख्य आरोपी मोती सिंह को पुलिस ने मार गिराया है। मोती सिंह को पुलिस ने रेकी करके करथला रोड पर घेरा था, जिसके बाद दोनों पक्षों से खूब फायरिंग हुई। फायरिंग के दौरान शराब माफिया मोती सिंह को गोली लग गई और वह घायल हो गया. घायल अवस्था में पुलिस उसे अस्पताल ले गयी, जहां डॉक्टरों ने उसे मरा हुआ घोषित कर दिया. पुलिस ने आरोपी के पास से दारोगा का तमंचा बरामद किया है.

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कैसे हुई मुठभेड़

कासगंज के एसपी मनोज कुमार सोनकर ने इस मामले का विवरण देते हुए पूरी घटना के बारे में बताया कि मोती सिंह पर एक लाख रुपये का इनाम था, जिसको पकड़ने के लिए पुलिस की छह टीमों का गठन किया गया था। एसपी मनोज कुमार सोनकर ने इसके आगे बताया कि  बीती रात उन्हें पता लगा कि मोती अपने साथियों के साथ करतला रोड, काली नदी के पास जंगल में छिप कर बैठा है। सुबह ढाई से तीन बजे के बीच ही पुलिस टीम ने जंगल में घेराबंदी कर दी, जिसके बाद बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। एसपी ने बताया कि पुलिस टीम ने भी फायरिंग के बदले फायरिंग की जिसमें नगला धीमर, थाना सिढ़पुरा निवासी मोती को गोली लगी और वह घायल हो गया। एक बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया।

गोली लगने के बाद घायल मोती को इलाज के लिए पुलिस पास के अस्पताल सिढ़पुरा ले गई, जहां से जिला अस्पताल कासगंज रेफर कर दिया और वहां डॉक्टर ने इलाज के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस के अनुसार मोती के पास से दारोगा से लूटा हउआ सामान बरामद हुआ है, जिसमें सरकारी पिस्टल, खोखा, कारतूस और 315 बोर का एक तमंचा शामिल है। पंचायत नामा भरने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इसके पहले भी एक बदमाश घायल हुआ था, जिसकी फोटो से पहचान करने पर मोती पुत्र हुब्बलाल, निवासी नगला धीमर, थाना सिढ़पुरा के बताया गया था, और उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया था।

9 फरवरी की रात हुई थी सिपाही की हत्या

आपको बता दें कि मोती सिंह ने 9 फरवरी की रात पुलिस टीम पर हमला कर सिपाही देवेंद्र की हत्या की  थी  और इस हमले में दरोगा घायल हुआ था। इस कांड के मास्टरमाइंड और शराब माफिया मोती संग उनके भाइयों  को पकड़ने के लिए पुलिस दिन रात जुटी हुई थी। मोती की खोज में पुलिस ने सुनसान गंगा खादर की तरफ भी काफी खोज की, लेकिन वहां उनकी मेहनत सफल ना हुई। चप्पा चप्पा छानने पर भी मोती कई बार उनके हाथ आते आते रह गया। कई लोग पुलिस के शक के दायरे पर थे, जिनको हिरासत में लेकर पुलिस ने पूछताछ भी की।

मोती के सूचना स्त्रोत थे गहरे

सिपाही के हत्यारे को पकड़ने के लिए पुलिस से ज्यादा हत्यारोपी के सूचना स्त्रोत काफी गहरे थे। उसे बहुत जल्दी होने वाली चीजों का पता चल जाता है। बताया गया कि आरोपी की तलाश में जब पुलिस जुटी थी, तब पुलिस की लोकेशन आरोपी को पता लग रही थी। खबर ये भी है कि उसके गांव के बच्चे तक उसे पुलिस की लोकेशन बता रहे थे। इसके कारण ही आरोपी  पुलिस के हात्थे नहीं चढ़ पा रहा था।

मोती के भाई एलकार के भी हुए थे ऐसे हाल

केवल मोती ही नहीं उनसे पहले पुलिस ने  मोती का भाई एलकार आरोपी को भी मुठभेड़ में मार गिराया था। एलकार के जैसे ही मोती का भी हाल हुआ।  पुलिस के बताए अनुसार सिपाही देवेंद्र जसावत की हत्या में एलकार का भी हाथ था। काली नदी की कटरी किनारे मुठभेड़ में एलकार का पुलिस ने एंकाउंटर कर दिया था। गांव धीमर का रहने वाला एलकार भी पुराना हिस्ट्रीशीटर था। उसके खिलाफ भी कई मामले दर्ज थें।

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