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विपक्ष खेल रहा भाजपा की गेंद पर, पहली बार मायावती ने बेरोजगारी को ऐसे बनाया मुद्दा

  • भाजपा ने सबको सिखा दिया मंदिरों में मत्था टेकना
  • लोगों के दिल छुने वाले मुद्दों से भटक चुका है विपक्ष

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने पूरे विपक्ष को मंदिरों में मत्था टेकना सिखा दिया। चुनाव के समय किसी को परशुराम तो किसी किसी को श्रीकृष्ण याद आने लगे। यही कुछ समय पहले भाजपा को छोड़ किसी पार्टी का नेता समुदाय विशेष की तुष्टिकरण की नीति में तल्लीन रहने कारण हिन्दू शब्द से बचता था। यह विधानसभा चुनाव भी जाति व संप्रदाय के बीच ही अब तक लड़ा जा रहा था। कोई लड़ाने तो कोई बचाने में जुटा हुआ था। इस बीच बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाकर युवा वर्ग को लुभाने के साथ ही माहौल को बदलने की कोशिश की है। अब यह मुद्दा विधानसभा चुनाव में कितना काम आएगा, यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मायावती ने युवाओं की नब्ज को टटोल कर अपने पहले चुनावी भाषण में ही अच्छा मुद्दा उठाया है।

इस संबंध में राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि अब तक भाजपा की गेंद पर विपक्ष खेलता रहा। लखीमपुर कांड में भी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि जो भाजपा के लिए फायदेमंद था, वही हुआ। वहां सपा को आगे होना चाहिए था, वहां कांग्रेस आगे हो गयी। इससे भाजपा से नाराज लोगों का कुछ हिस्सा कांग्रेस में जाने से वोट बंटवारा से भाजपा ही फायदे में रहेगी। पहली बार बसपा प्रमुख ने अपना नया दांव चला है। इससे युवाओं पर जरूर असर पड़ेगा। इस समय विपक्ष दो ही मुद्दों पर भाजपा से लड़ सकता है, महंगाई और बेरोजगारी और ये दोनों मुद्दे चुनाव मैदान से विलुप्त हैं। महंगाई व बेरोजगारी लोगों के दिल छुने वाले मुद्दे हैं।

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युवाओं को लुभाने की कोशिश मायावती

मायावती द्वारा उठाये गये बेरोजगारी के मुद्दे के संबंध में लखीमपुर खीरी के वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह राणा का कहना है कि बेरोजगारी की अपेक्षा भी महंगाई ज्यादा बड़ा मुद्दा हो सकता है। बेरोजगारी को उठाकर मायावती ने युवाओं को लुभाने की कोशिश की है लेकिन उसमें वे सफल हों, ऐसी संभावना नहीं दिख रही।
कांग्रेस की तरह हो गयी है बसपा की स्थिति

लोगों के मन में धीरे-धीरे बैठता जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की तरह ही बसपा की भी हालत हो चुकी है। इस कारण वे भाजपा से लड़ती हुई नहीं दिखा पा रही है। वर्तमान में दो ही पार्टियां दिख रहीं है। भाजपा और विरोध में सपा। हालांकि प्रियंका की सक्रियता लखीमपुर सहित कई जिलों में भाजपा से असंतुष्ट लोगों को अपनी तरफ खिंचने का काम करेगी।

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राजनीतिक विश्लेषक उपेन्द्र नाथ की रिपोर्ट

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