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ऑपरेशन खुशबू : दो महीने से आयकर विभाग के निशाने पर थे पुष्पराज जैन

कानपुर/ लखनऊ। डीजीजीआई के बाद अब आयकर विभाग ने ‘ऑपरेशन खुशबू’ छेड़ दिया है। कर चोरी की जांच को लेकर शुक्रवार को कन्नौज के बड़े इत्र कारोबारी एवं सपा एमएलसी पुष्पराज जैन उर्फ पम्पी जैन और मियां मलिक के ठिकानों पर छापेमारी की गयी। बताया जा रहा है कि पुष्पराज जैन और मलिक मियां के ठिकानों पर आयकर छापों की तैयारी डीजीजीआई से पहले ही की जा रही थी। पीयूष जैन पर छापों के आठ दिनों के बाद कार्रवाई की गई। पुष्पराज जैन सहित कई बड़े इत्र कारोबारियों पर आयकर छापे की तैयारी दो महीने पहले से थी।
इत्र कारोबारी का कारोबार, टर्नओवर, आईटीआर की गहन छानबीन की जा रही थी। साथ ही कन्नौज, कानपुर से लेकर मुंबई तक फैले उनके बिजनेस का पूरा ब्यौरा जुटाया गया। बताया जा रहा कि आईटीआर की तुलना में उनका व्यापार कहीं ज्यादा बड़ा है। बड़ी संख्या में इन कारोबारियों के रिश्तेदार भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर लिप्त थे। संदेह था कि इनमें कई डमी नाम हैं और असल में कारोबार के असली मालिक यही दोनों हैं। उन पर कार्रवाई की तैयारी लगभग पूरी थी लेकिन डीजीजीआई अहमदाबाद के आ जाने से अभियान रोक दिया गया। पीयूष जैन के खुलासे के तत्काल बाद आयकर ने अपनी कार्रवाई कर दी क्योंकि पीयूष मामले में भी पम्पी जैन का नाम जोड़ा गया था। छापेमारी में मिले अरबों के कैश का कनेक्शन तलाशा जा रहा था।

याकूब के भाई के तीन ठिकानों पर कार्रवाई

आयकर विभाग की 12 टीमों ने राजधानी में तीन स्थानों पर छापेमारी की। एक टीम सुबह आठ बजे प्राग नारायण रोड 45 नंबर मकान पर पहुंची। यह बंगला इत्र कारोबारी याकूब मलिक के भाई मलिक का बताया जा रहा है। यहां दो टीमें शाम चार बजे तक रहीं। सर्च की कार्रवाई करके निकलीं पर पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को यह कहकर वहीं छोड़ दिया कि अभी कार्रवाई जारी है। दूसरी तरफ हजरतगंज के जनपथ मार्केट स्थित इत्र के एक और कारोबारी के दफ्तर पर छापा मारा गया है। अवध विहार योजना स्थित उनके घर पर पहुंची। यह कारोबारी कानपुर से जुड़े हैं। अवध विहार योजना स्थित मकान में किराएदार मिले, जिसके बाद टीम वहां से भी लौट आई। बताया जा रहा है कि देर शाम तक कहीं कोई भी बरामदगी नहीं है। माना जा रहा है कि कानपुर-कन्नौज से मिले इनपुट पर यह छापेमारी की गई है। कानपुर में छापेमारी का दायरा ज्यादा बढ़ने के बाद आयकर लखनऊ मुख्यालय से 25 टीमें कानपुर के लिए रवाना की गई है। वहां अभी और स्थानों पर छापेमारी हो सकती है।

संसारचंद से ऐसा है पुष्पराज जैन रिश्ता

कानपुर के पूर्व जीएसटी कमिश्नर संसारचंद से भी इत्र कारोबारी पम्पी जैन का नाम जुड़ा था। वर्ष 2018 में संसारचंद को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। जांच के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। इस वर्ष जुलाई में सीबीआई ने उन पर भ्रष्टाचार का नया केस दायर किया था। संसारचंद ने विरोध किया था। सीबीआई जांच के मुताबिक संसारचंद ने टैक्स चोरी रोकने के बजाय उत्पादक इकाइयों, सेवा प्रदाताओं और बड़ी फर्मों को कर चोरी की खुली छूट दी थी। कम्पनियों को छूट देने के बदले में मोटा माल लिया जाता था। एमएलसी पुष्पराज जैन पर आरोप लगे थे कि सीजीएसटी के एक सुपरिटेंडेंट के जरिए संसारचंद को कैश घूस देते थे। कानपुर की एक बड़ी इस्पात कंपनी से घूस लेने का जिम्मा दूसरे सुपरिटेंडेंट को दिया गया था। आरोप लगा कि एक अन्य सुपरिटेंडेंट घूस के नेटवर्क में पुष्पराज जैन की मदद करते थे। वहां से आने वाली घूस की कमाई को हवाला कारोबारी के जरिए दिल्ली पहुंचा दिया जाता था।

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