Monday, December 6, 2021

PM MODI की पहल पर कनाडा से आयी मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा, ऐसी है काशी की विरासत

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वाराणसी। काशी वासियों को एक धार्मिक सौगात मिलने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी की पहल पर मां अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति कनाडा सरकार ने भारत वापस भेजी है। इसके बाद वाराणसी से सदियों पहले गायब हुई अन्नपूर्णा की मूर्ति काशी में एक बार फिर स्थापित हो जाएगी। काशी के भक्तों के लिए उनकी आराध्य मां अन्नपूर्णा मंदिर में विराजित होंगी। मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ 15 नवंबर को काशी में करेंगे। 11 नवंबर को अन्नपूर्णा की मूर्ति दिल्ली से वाराणसी के लिए रवाना होगी। मूर्ति के रास्ते में पड़ने वाले कई जिलों में इसके पड़ाव होंगे। भगवान शिव की नगरी काशी को अन्न क्षेत्र भी कहा जाता है। भगवान शिव ने काशी में मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी। इस लिए काशी में मां अन्नपूर्णा का विशेष महत्व है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सदियों पहले काशी से गायब हुई मां अन्नपूर्णा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा काशी में करने वाले हैं। पीएम के निर्देश पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मां अन्नपूर्णा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा विशेष मुहूर्त में पूरे विधि-विधान से करेंगे। ज्ञात हो कि अन्नपूर्णा जी की मूर्ति के एक हाथ में अन्न और दूसरे में खीर है। यह मूर्ति काशी विश्वनाथ धाम के प्रांगण में स्थापित किया जा सकता है। 11 नवंबर को मूर्ति दिल्ली से सुसज्जित वाहन से जुलुस के रूप में चलेगी। यह 12 को सोरा, खासगंज में रुकेगी 13 को कानपुर, 14 को अयोध्या में रहेगी और 15 नवंबर को वाराणसी पहुंचेगी।

काशी के धर्म के जानकार बताते हैं कि सदियों पहले काशी से मां अन्नपूर्णा की मूर्ति के गायब होने की जानकारी मिलती है। काशी विद्वत परिषद् के महामंत्री और अन्नपूर्णा मठ के आचार्य प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी ने बतया कि मूर्ति के भारत आने और काशी में पुनः स्थापित होने से पूरे सनातन धर्मियों में काफी खुशी है। इससे एक बार फिर वह अपनी विरासत से जुड़ जाएंगे। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म की विरासत सांस्कृतिक व धर्म की राजधानी काशी के प्रांगण में दोबारा स्थापित हो रही है। इसका श्रेय प्रधानमंत्री को जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषि द्विवेदी ने बताया कि 15 नवंबर को विशेष मुहूर्त उदया तिथि के मान के तहत प्रबोधिनी एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु चातुर्मास के बाद जागते हैं। इसी दिन से शुभ कार्य का शुभारंभ भी होता है। इसी दिन तुलसी जी का विवाह भी होता है।

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