yogi adityanath

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) अब उन अस्पतालों के खिलाफ एक्शन मोड में आ गए हैं जिन्होंने कोरोना काल में मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर इलाज के दौरान मनमानी वसूली की थी। साथ ही अन्य दूसरी गड़बड़ियां भी की थी। सरकार ने राज्य के 10 अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं, जबकि 9 अस्पतालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सरकार द्वारा अब इन अस्पतालों के सीएमओ और सबंधित जिले के जिलाधिकारियों से शीघ्र ही जवाब तलब की कार्रवाई की जाएगी। अगर मनमाने रेट वसूली मामले में ये अस्पताल दोषी पाए गये तो अस्पताल संचालकों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई की जाएगी।

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गौरतलब है कि कोरोना की दूसरी लहर ने प्रदेश में कोहराम मचा दिया था। इस दौरान निजी अस्पताल संचालकों ने मरीजों से इलाज के नाम पर मनमानी रेट वसूले थे। साथ ही उन पर इलाज में लापरवाही बरतने, दुर्व्यवहार करने, ऑक्सीजन की कृत्रिम कमी बताने व अन्य अनियमितताओं के भी आरोप लगे थे। इस तरह की शिकायतें एक दो नहीं बल्कि प्रदेश के 33 जिलों से कुल 184 शिकायतें आईं हैं। इन शिकायतों की जब जांच की गई तो 68 शिकायतें सही पाई गईं। अब इन्हीं शिकायतों के आधार पर 117 मामलों में निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू कर दी गयी है। वहीं कई मामलों में अस्पतालों द्वारा मरीजों से वसूला गया ज्यादा पैसा भी लोगों को वापस कराया गया तो कई जगह लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की गयी है।

किन अस्पतालों व नर्सिंग होम के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत?

जिन अस्पतालों और नर्सिंग होम के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है उनमें आजमगढ़, आगरा, औरैया, बाराबंकी, मथुरा, हाथरस, मेरठ, गाजियाबाद, भदोही, बुलंदशहर, गौतबुद्धनगर,मुजफ्फरनगर,बहराइच, बागपत, हापुड़,संभल, सहारनपुर, शामली, कानपुर नगर, कानपुर देहात, शाहजहांपुर, इटावा,लखनऊ, खीरी,वाराणसी, जौनपुर, मऊ, गोरखपुर, बस्ती, बरेली, मुरादाबाद, प्रयागराज व रामपुर के अस्पताल शामिल हैं.

मरीज को वापस कराए गए 80 हजार रुपये

कोरोना काल के पीक के दौरान आगरा के एक निजी अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाया गया था। इस दौरान अस्पताल ने एक मरीज से इलाज के नाम पर अधिक पैसे वसूले जिसकी मरीज ने शिकायत की। जांच के बाद अस्पताल ने मरीज को 80 हजार रुपये वापस कराए हैं। ऐसे ही आगरा के कई और अस्पताल हैं जिन्होंने मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाया था पर अब वसूली गई फीस लौटानी पड़ी है।

इनके खिलाफ हुआ एक्शन

  • मेरठ के एक अस्पताल संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज।
  • गाजियाबाद में एक अस्पताल का लाइसेंस निरस्त व एक का स्थगित।
  • बुलंदशहर के एक प्राइवेट अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर संचालक के खिलाफ दर्ज किया गया मामला।
  • भदोही में निजी नर्सिंग होम ने ऑक्सीजन के नाम पर ज्यादा पैसा वसूला। उसे नोटिस देकर मांगा गया जवाब।

अपर मुख्य सचिव बोले-

इस पूरे मामले में अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी का कहना है कि मुख्यमंत्री का सख्त निर्देश है कि कोरोना काल में मरीजों से ओवरचार्ज करने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई की जाए इसीलिए प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई शिकायतों के आधार पर पहले उन्हें नोटिस देकर जवाब मांगा गया। इसके बाद जांच कराई गई। इस दौरान दोषी पाए गए कई अस्पतालों के खिलाफ FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जा रही है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

किन अस्पतालों के खिलाफ हुई FIR

कृष्ण सुपर स्पेशलिटी , फैमली अस्पताल , तुलसी अस्पताल व फार्च्यून कानपुर।
आस्था अस्पताल, बस्ती (आरोपी जेल भेज गए) शिवा अस्पताल बस्ती।
दिव्यांशु अस्पताल जौनपुर।
बिल्लाह हॉस्पिटल बुलंशहर।
दो अपंजीकृत चिकित्सक, मेरठ।
आस्था अस्पताल बाराबंकी।

इन्हें भेजा गया नोटिस, जांच व कार्रवाई भी हुई

आगरा- रवि हॉस्पिटल, आयुष्मान, हेरिटेज, शांतिदेवी इन्स्टीटयूट, रामरघु हास्पिटल, नयति हॉस्पिटल ,ओम हॉस्पिटल,सिनर्जी हॉस्पिटल, कमलेश टंडन नर्सिंग होम, यशवंत हॉस्पिटल।
मुरादाबाद- ब्राइट स्टार।
बस्ती – शिवा हॉस्पिटल, हैप्पी अस्पताल, आस्था हॉस्पिटल।
भदोही- जियाहार्ट केयर सेंटर, जीवन दीप।
कानपुर देहात- राजावत हॉस्पिटल।
मेरठ- आस्था, भूपाल नर्सिंग होम।
बुलंदशहर- बिल्लाह हॉस्पिटल।
कानपुर- कृष्णा सुपर स्पेशयलिटी ,फैमली अस्पताल, तुलसी, फार्च्यून अस्पताल।
इटावा- दिव्यांशी हॉस्पिटल।
शामली- दिव्या पैरामेडिकल व गंगा अमृत हॉस्पिटल।

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