Friday, December 3, 2021

जब एक ही पहर और एक ही चौखट से उठी बहन की डोली और भाई की अर्थी, तब हर आंखें बेबस थी आंसू बहाने को

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कानपुर : परिवार में जशन का माहौल था। हर किसी के चेहरे पर एक अनुपम मुस्कान अपने शैशव काल से गुजरते हुए युवावस्था की ओर दस्तक देने पर उतारू ही थी…लेकिन अफसोस नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। एक तरफ बहन के हाथ पीले हो रहे थे। परिवार के सभी लोग शादी की तैयारियों में जुटे हुए थे। सभी लोग अपने-अपने काम को अंजाम तक पहुंचाने में मशगूल थे। वहीं, दुल्हन के पिता और भाई भी शादी की तैयारियों में इस कदर मशगूल थे कि उन्हें कुछ सूझ ही नहीं रहा था। ये भी पढ़े :हैवान ने आग लगाई, तो उसी से लिपट गई रेप पीड़ित; मिली मौत

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गुजरते वक्त के साथ। अब वो लम्हा भी बेहद करीब आ रहा था, जिसका पूरे कुनबे को काफी बेसब्री से इंतजार था। बारात भी खुशी के सैलाब में सराबोर होकर दुल्हन के घर पर अभी दस्तक ही देने वाले थे कि किसी ने लड़की के पिता को बता दिया, ‘आपके यहां बराती बस आने ही वाले हैं, तैयारी हो गई है न सारी’ उस वक्त बेटी के पिता को झट से याद आया कि मुझे एक समान और मंगवाना है। उसने फौरन अपने 19 साल के जवान बेटे से बोला, ‘हे सुनो..बाजार से ये समान ले आओ। दुल्हे वाले बस आने वाले ही हैं। जल्दी से आना देर मत करना’

पिता के आज्ञा का पालन करते हुए बेटा फौरन चला गया, लेकिन अफसोस नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। नियति को शायद मंजूर नहीं था कि इस कुनबे में खुशियां बरकरार रहे। पिता अपनी बेटी की शादी में इस कदर मशगूल था कि उसे कुछ सूझ ही नहीं था कि फौरन किसी ने कहा, ‘भइया जी…आपके  बेटे का एक्सीडेंट हो गया। एक बाइक वाले ने उसे टक्कर मार दी’ हालांकि, मौका-ए-वारदात पर राहगीरों ने उसे सीएचसी अस्पताल पहुंचाया। मगर, अफसोस मेडीकल डॉक्टरों मेडिकल डिग्रियों में भी इतनी लियाकत नहीं बची थी कि उसे बाचकर इस परिवार की खुशियां बचाई जा सके, इसलिए अपनी असमर्थता का परिचय देते हुए डॉक्टरों ने उस मृत घोषित कर दिया।

वहीं, अपने बेटे की मौत की खबर जैसी ही पिता को लगी, तो एक पल के लिए वो अपने आपको रोक नहीं पाएं। मानो जैसा लगा कि दुखों का पहाड़ अब उनके ऊपर टूट गया है। बेटे की मौत से रूबरू होने के बाद वो बिलख-बिलख कर रोने लगें। फिर कुछ लोगों ने उन्हें समझाया कि भइया अभी अपने आपको संभालिए। घर में शादी का माहौल है। बेटी की विदाई होनी है। ऐसे में ये खबर परिवार को न दी जाए, तो यही अच्छा रहेगा।

जैसे-तैसे पिता ने अपनी बेटी की शादी की सारी रस्मे निभाई। आंखों से आने वाले हर आंसू को पिता ने रोकनेे का साहस किया। उन्होंने अपनी पत्नी को भी ये बात नहीं बचाई। जैसे-तैसे, कैसे भी करके उन्होंने अपनी बेटी की शादी की सारी रस्में अदा की। वहीं, जैसे ही अगले दिन का सूर्य उदय हुआ, तो बेटे हिमांशु की मौत की खबर पूरे घर को जैसे ही हुई तो मानो कोहराम मच गया। शादी में शामिल शायद ही ऐसा कोई शख्स बचा होगा, जिसकी आंखों से आंसू की धारा न फूटी हो। हर एक शख्स की आंखें गमगीन थी। सभी के सभी निशब्द हो चुके थे।

वहीं, जैसे ही बेटे हिमांशू का शव घर लाया गया तो अपने हो चाहे पराए हर कोई फूट-फूट कर रोने लगा। हर एक शख्स अपने आंसू को बहाने में बेबस था। कई मर्तबा तो दुल्हन अपने भाई के शव के पास जाकर बेसुध भी हो गई, जो कोई-भी परिवार को ढ़ाढास बंधाने की कोशिश करता, उसकी आंखों से खुद ही आंसूओं का सैलाब फूट पड़ता। फिलहाल, परिजनों ने शव को औरेया नदी के किनारे ले जाकर अन्तिम संस्कार कर दिया है।

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