Friday, December 3, 2021

एक विधायक के बदले BJP ने तोड़े चार MLC, अखिलेश से भाजपा ने ऐसे लिया बदला

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लखनऊ। विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सेंधमारी का सियासी सेंधमारी से दिया जा रहा है। विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक दलों के बीच एक-दूसरे के संगठन में सेंध लगाने, विधायकों को तोड़कर पार्टी ज्वाइन कराने का सिलसिला तेज हो गया है। भाजपा ने बुधवार को समाजवादी पार्टी के चार एमएलसी नरेन्द्र भाटी, सीपी चंद्र, रविशंकर सिंह और रमा निरंजन को पार्टी में शामिल राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से हिसाब बराबर कर लिया है। ज्ञात हो कि 30 अक्टूबर को ही अखिलेश यादव ने बीएसपी के छह बागी विधायकों के साथ सीतापुर भाजपा विधायक राकेश राठौर को भी समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। राकेश राठौर के जाने से भारतीय जनता पार्टी को धक्का लगा था। बुधवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और डा. दिनेश शर्मा की मौजूदगी में सपा नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। सपा नेताओं का भाजपा में शामिल होना अखिलेश के लिए बड़ा झटका है।

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यूपी चुनाव के ठीक पहले चार एमएलसी जाना बड़ा सियासी समीकरण है। नरेन्द्र सिंह भाटी के पार्टी छोड़ने को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गुर्जर राजनीति में नए समीकरण बनेंगे। दादरी तहसील के बोड़ाकी गांव के रहने वाले किसान प्रेम सिंह के पुत्र नरेंद्र सिंह भाटी ने बैनामा लेखक के रूप में कॅरिअर शुरू किया था। पांच साल तक उन्होंने दादरी तहसील में बैनामा लेखक के रूप में काम भी किया। 1975 में उन्होंने युवा कांग्रेस सदस्य के रूप में राजनीतिक पारी शुरु की। 1980 में ब्लॉक प्रमुख चुने गए और दो बार ब्लाक प्रमुख बने। इसके बाद उन्होंने विधानसभा की राजनीति में कदम रखा और 1989 और 1991 में वह जनता दल के टिकट पर यहां से चुनाव जीत कर विधायक बनें।

कुछ दिनों के बाद उन्होंने सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। वर्ष 1996 में वह सपा के टिकट पर सिकंदराबाद से विधायक चुने गये। इसके बाद से वह विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं जीत सके। 7 मार्च 2016 को समाजवादी पार्टी ने उन्हें एमएलसी बनाया। इस दौरान वह यूपी स्टेट एग्रो इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष भी रहे। कई बार हारने के बावजूद मुलायम सिंह यादव ने उनका साथ नहीं छोड़ा था और सिकंदराबाद में आयोजित एक सभा में भीड़ से यहां तक कह दिया दिया था कि आप इसे हराते रहो, मैं टिकट देता रहूंगा। अब लंबे समय बाद नरेंद्र भाटी सपा का साथ छोड़ने जा रहे हैं। उनके जाने से सपा को झटका लगा है।

गुर्जर राजनीति गरमाएगी

सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा के विवाद के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इन दिनों गुर्जर राजनीति गरमाई हुई है। भारतीय जनता पार्टी की किसान आंदोलन और गुर्जर समीकरण पर नजर है। उन्हें जिले को गुर्जर राजनीति का केन्द्र माना जाता है। क्षेत्र के प्रमुख गुर्जर नेता और यहां के पूर्व लोकसभा सांसद और राज्यसभा सांसद सुरेन्द्र नागर पहले ही सपा छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। अब नरेंद्र भाटी भी सपा का साथ छोड़ भाजपा में आ रहे हैं। नरेन्द्र भाटी 2009 में सुरेन्द्र नागर के सामने चुनाव लड़ चुके हैं। ऐसे में तय है कि यहां पर गुर्जर राजनीति भी तेज होगी और गुर्जर नेताओं के दो धड़े होंगे। भारतीय जनता पार्टी पर बदले समीकरण का फायदा उठायेगी।

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