Atul rai

लखनऊ /वाराणसी। मऊ के सांसद अतुल राय के साथ ही पुलिस अधिकारियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। अतुल राय पर रेप का आरोप और पीड़िता के आत्मदाह के मामले में सख्ती शुरू हो गयी है। वाराणसी के तत्कालीन एडीसीपी विकास चंद्र त्रिपाठी की विभागीय जांच होगी। तत्कालीन एसीपी विनय कुमार सिंह पर भी लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। विनय कुमार सिंह को नोटिस जारी की गई है। एसीएस होम अवनीश अवस्थी ने इस मामले में निर्देश जारी कर दिया है। विकास चंद्र त्रिपाठी को पहले ही वाराणसी से हटाकर डीजीपी मुख्यालय से अटैच किया गया था। मऊ की घोसी सीट से सांसद अतुल राय पर बलिया की रहने वाली युवती ने रेप का आरोप लगा था। वाराणसी के लंका थाने में अतुल राय पर मुकदमा दर्ज कराया गया था। अतुल राय की तरफ से भी पीड़िता और उसके एक साथी पर पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज किया गया। पीड़िता की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कोर्ट से वारंट जारी करा लिया। इसे लेकर पीड़िता ने वाराणसी के अधिकारियों से कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस अधिकारी मामले में शिथिलता बरतते रहे।

अगस्त में सुप्रीम कोर्ट के सामने पीड़िता ने अपने साथी समेत आत्मदाह कर लिया। आत्मदाह से पहले फेसबुक लाइव करते हुए पीड़िता और उसके साथी ने वाराणसी के पुलिस अधिकारियों पर उसे परेशान करने का आरोप लगाया और मामले को मीडिया के सामने एक बार उजागर किया। पीड़िता के आत्मदाह करते हुए शासन ने तेजी से कार्रवाई करते हुए वाराणसी के तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक को गाजियाबाद के डीआईजी पद से हटा दिया। वाराणसी के कैंट थाना प्रभारी और विवेचक को निलंबित कर दिया गया। रेप और आत्मदाह के मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए डीजी और एडीजी स्तर के अधिकारियों वाली एसआईटी बना दी। एसआईटी की टीम जांच कर रही है। वाराणसी के तत्कालीन अधिकारियों के बयान लिये जा रहे हैं। पूर्व आईजी अमिताभ ठाकुर का भी बयान लिया गया और उन्हें कुछ दिनों पहले गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया गया।

इस बीच अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी की ओर से वाराणसी में तैनात रहे एडीसीपी विकास चंद्र त्रिपाठी के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश दे दिया है। तत्कालीन एसीपी विनय कुमार सिंह पर भी महिला के आरोपों की जांच में लापरवाही व संवेदनशीलता न बरतने के आरोप लगा है। विनय कुमार सिंह को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विनय कुमार सिंह को 15 दिन में जवाब दाखिल करना होगा। ज्ञात हो कि पीड़िता और उसके साथी की जब कहीं सुनवाई नहीं हुई। उस पर अनावश्यक दबाव बनाया गया तो उसने सुप्रीम कोर्ट के बाहर आत्मदाह कर लिया। इस दौरान फेसबुल लाइव भी किया। इलाज के दौरान पीड़िता और उसके साथी की मौत हो गयी।

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