Friday, December 3, 2021

रायबरेली-आजमगढ़ में BJP ने की बड़ी सेंधमारी, अदिति सिंह समेत तीन विधायक हुए भाजपाई

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने रायबरेली और आजमगढ़ में जबर्दस्त सेंधमारी की है। रायबरेली से कांग्रेस की विधायक अदिति सिंह और आजमगढ़ की सगड़ी सीट से विधायक वंदना सिंह को भारतीय जनता पार्टी ने अपने पाले में कर लिया है। साथ ही राकेश प्रताप ने भी बीजेपी जॉइन कर ली है। बुधवार को दोनों विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया। बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की उपस्थिति में अदिति सिंह ने बुधवार शाम को पार्टी की सदस्यता ली। सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली की सदर सीट से अदिति सिंह विधायक हैं। इन दोनों विधायकों के अलावा विधायक राकेश प्रताप सिंह ने भी भाजपा की सदस्यता ली। राकेश प्रताप सिंह सोनिया गांधी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ने वाले दिनेश प्रताप सिंह के छोटे भाई हैं। बीजेपी को आजमगढ़ और रायबरेली में लगातार मायूसी हाथ लगी है। इस बार चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस में सेंधमारी कर दी है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। रायबरेली में दोनो बार कांग्रेस से सोनिया गांधी ने जीत हासिल की। आजमगढ़ में 2014 में मुलायम सिंह यादव और 2019 में अखिलेश यादव ने जीत हासिल की थी।

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2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के बाद भी आजमगढ़ की दस में से नौ सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। आजमगढ़ और रायबरेली भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौती रहा है। यहां पांच सीटे सपा और चार बसपा ने जीती थी। इन्हीं में से एक सीट सगड़ी पर बसपा के टिकट पर वंदना सिंह निर्वाचित हुई थीं। बाद में वंदना सिंह को मायावती ने निलंबित कर दिया था। अदिति सिंह पिछले डेढ़ साल से कांग्रेस में बगावती रुख अख्तियार किया हुआ था। वह कांग्रेस की नीतियों से नाराज थीं। अदिति सिंह पिछले कुछ समय से सीधे प्रियका गांधी के खिलाफ लगातार हमलावर रही हैं। अदिति सिंह लखीमपुर खीरी का मामला हो या फिर कृषि कानून वापसी का उन्होंने हमेशा प्रियंका गांधी की राजनीति पर निशाना साधा और उनसे तीखे सवाल किये।

कांग्रेस उनके खिलाफ विधानसभा की सदस्यता रद करने की अर्जी भी दी थी। जब तक अखिलेश सिंह रायबरेली सदर से विधायक रहे, वह लगातार गांधी परिवार को चुनौती देते रहे हैं। तबियत बिगड़ने के बाद उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर अदिति सिंह को 2017 में चुनाव लड़वाया और विधायक बनवाया। बावजूद इसके रायबरेली सदर की सीट कभी भी कांग्रेस की नहीं मानी गयी। वहां अखिलेश सिंह का दबदबा रहा है। पिता के मौत के बाद अदिति सिंह भी उनकी दबंग छवि के साथ समझौता नहीं कर रही हैं। वे लगातार कांग्रेस की नीतियों को चुनौती दे रही हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी हर मुद्दे का राजनीतिकरण कर देती हैं जो ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि लखमीपुर खीरी मामले की सीबीआई जांच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लिया है। अगर उनके इन संस्थाओं में ही विश्वास नहीं है तो मुझे समझ में नहीं आता कि उनका किस पर विश्वास है। उन्हें देश की संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास करना होगा।

पिता की विरासत को बचाए रखने की चुनौती

राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो अदिति सिंह अपने पिता के वर्चस्व को बनाये रखते हुए अपने कॅरिअर को आगे बढ़ाना चाहती हैं। कांग्रेस के साथ रहकर यह संभव नहीं था क्योंकि उनके पिता की गांधी परिवार से अदावत रही है। अगर पिता के विरासत को आगे बढ़ाना है तो उन्हें अपनी राजनीति की राहें अलग करनी होगी। अदिति सिंह यह बात बखूबी जानती हैं कि उन्हें भविष्य में किस राह को पकड़ना है।

पंजाब कांग्रेस से विधायक हैं अदिति के पति अंगद सिंह

ज्ञात हो कि अदिति सिंह के पति अंगद सिंह पंजाब में कांग्रेस के विधायक हैं। इससे पहले कहा जा रहा था कि अदिति सिंह पति कांग्रेस छोड़ने के बाद आने वाले विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार हो सकती हैं। बताया जा रहा था कि बीजेपी जॉइन करने से उनके पति की स्थिति कांग्रेस में खराब हो सकती है।

योगी और बीजेपी के साथ थी नजदीकियां

अदिति सिंह की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी से काफी नजदीकी पहले से दिखी है। अतिदि सिंह बीजेपी सरकार के कामकाज की तारीफ करती रही हैं। उन्होंने जम्मू कश्मीर से 370 हटाने का समर्थन किया था। कांग्रेस ने अदिति सिंह की सदस्यता खत्म करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के यहां अपील की थी।

यह भी पढ़ेंः-बागी विधायक अदिति सिंह ने प्रियंका गांधी पर साधा निशाना, नीयत में खोट और दिल साफ नहीं है

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