Friday, December 3, 2021

विकास दुबे की अपनी अदालत, 1994 के बाद ऐसे हुई अपराध की दुनिया में ‘एंट्री’, पिता हैं वजह

Must read

- Advertisement -

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) के चौबेपुर थाना क्षेत्र में 3 जुलाई की रात घटी घटना से पूरा प्रदेश हिल चुका है. जिस गैंगस्टर विकास दुबे को पुलिस टीम हिरासत में लेने पहुंची थीं उसी गैंगस्टर ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर पुलिस टीम पर हमला बोल दिया जिसमें एक सीओ समेत 8 पुलिसवालों की मौत हो गई. पुलिस की नाक के नीचे हुई इस घटना से पूरे प्रदेश में खौफ का माहौल है. क्योंकि, जिस विकास दुबे का नाम लोगों ने अब तक सुना नहीं अब उसके नाम के साथ कारनामे भी सामने आ रहे है. वैसे तो सीएम योगी के आदेश के बाद से विकास दुबे की तलाश की जा रही है. लेकिन विकास दुबे एक ऐसी शख्सियत है जिसका सिक्का कानपुर देहात में खूब चलता था. गांव वालों को कानून से ज्यादा विकास पर भरोसा है और जब भी न्याय मांगा जाता था तो लोग कानून का नहीं बल्कि विकास दुबे का दरवाजा खटखटाते थे.

- Advertisement -

कैसे हुई अपराध की दुनिया में एंट्री
विकास दुबे एक कुख्याती अपराधी है जिसके खिलाफ गांव वाले तक नहीं बोलते. पर विकास दुबे कैसे अपराध की दुनिया में पहुंचा ये भी जानना जरूरी है. दरअसल, विकास भी एक सामान्य युवक था और अपने परिवार के साथ खुश रहता था. जब बहन के पति की मौत हुई तो विकास उसके साथ रहने लगा और लंबे वक्त बाद जब अपने गांव विकरू पहुंचा तो मां-बाप के साथ रहने लगा. vikas dubey fatherवक्त था 1994 का जब दलित समाज के लोगों ने विकास के पिता के साथ बदसलूकी की और इतनी बेरहमी से मारा जिसने विकास दुबे के अंदर के शैतान को जगा दिया. पिता के साथ हुई इस घटना के बाद विकास ने बदला लेने की ठानी और घर में रखे असलहे को उठाकर उन लोगों के पास पहुंचा जिन्होंने उसके पिता के साथ गंदा बर्ताव किया था. इसी घटना के बाद विकास की पूरी दुनिया बदल गई.

लोग झुकाने लगे सिर
विकास दुबे के बारे में उनकी मुंहबोली बहन ने बताया कि, जब भाई ने पिताजी को उस हाल में देखा तो उन्हें काफी धक्का लगा था. इसी के बाद से हालात ऐसे हो गए जब गांव के लोग विकास के खौफ में जीने लगे. जब भी विकास अपने दोस्तों के साथ गांव में निकलता तो लोग उसके आगे सिर झुकाकर खड़े हो जाते और कई लोग तो पैर तक छूने लगे थे. पर गांव वाले विकास का सम्मान इसलिए भी करते थे क्योंकि, उसने कई गरीब लड़कियों की शादी कराई है और लोगों की हर तरह से मदद करता था.

पिता के लिए औलाद ही सबकुछ
विकास दुबे के आज की हालत पर उनके पिता राजकुमार का कहना है कि, ‘उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बेटा एक छोटे से झगड़े को इतना आगे लेकर जाएगा. उन्होंने विकास को ये सब करने से कई बार रोका पर जब वह हाथ से निकल गया तो क्या कर सकते हैं? क्योंकि औलाद चाहे जैसी भी हो एक पिता के लिए वही सबकुछ होती है.’

खुद ही कानून था विकास दुबे
अब जब विकास दुबे सामने आया है तो उसकी हर हरकत से पर्दा उठने लगा है. कानपुर देहात के एक छोटे से गांव में ही विकास की अलग दुनिया थी जिसका मालिक वो खुद था. बिकरू गांव की रहने वाले एक 80 साल की बुजुर्ग महिला ने बताया कि, 1995 के बाद विकास दुबे के घर के बाहर ही अदालत थी जिसका जज खुद विकास होता था औरvikas dubey इसकी सुनवाई सुबह 6 बजे शुरू होती थी. विकास की सुरक्षा में उसके अगल-बगल करीब 1 दर्जन लोग खड़े रहते थे और विकास लोगों की सुनवाई करता था. वैसे तो विकास ने लोगों की मदद की है लेकिन कई बार उसने मदद के बहाने लोगों से उनकी जमीन तक हड़प ली.

हालात ऐसे हैं गांव के कि, कुछ परिवार विकास का नाम सुनते ही भाग जाते हैं. विकास का खौफ इस कदर है कि, जब उसका काफिला निकलता है तो जितने लोग बाहर होते हैं सब अपने घरों में छिप जाते हैं और अगर कोई गलती से विकास की गाड़ी के आगे आ जाता है तो गाड़ी टक्कर मारकर निकल जाती है.

18 परिवार छोड़ चुके हैं गांव
विकास दुबे ने भले ही कई लोगों की मदद की लेकिन लोगों के भीतर उसका ऐसा खौफ था जिसने 18 परिवारों को गांव छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया. कई लोगों को तो अब विकास की मौत का इंतजार है. एक 80 साल के बुजुर्ग कहते हैं कि जब विकास की मौत होगी तभी हम चैन से जी पाएंगे.

ये भी पढ़ेंः- हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के घर पर चली जेसीबी, 50 कैमरे और जेल की दीवारें देख पुलिस के भी उड़े होश

- Advertisement -

More articles

Latest article