हाथरस केस: गांव छोड़ने पर मजबूर पीड़िता का परिवार, मिल रही ऐसी धमकियां, कह रहे हैं कि..

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हाथरस की बेटी को कब मिलेगा इंसाफ? इस सवाल के साथ पूरे देश का रोष अपने चरम पर है। मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है। वहीं, हमारे सियासी नुमाइंदे भी इस संवेदनशील मसले का सियासीकरण करने से बाज नहीं आ रहे हैं। एक तरफ जहां विपक्षी दल इसे लेकर प्रदेश सरकार के कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ सत्तारूढ़ दल इसे लेकर विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है। इतना ही नहीं, अब तो प्रदेश सरकार का यहां तक कहना है कि हाथरस तो बहाना अब दंगा भड़काना है, लेकिन इन सवालों के जमघट के बीच एक सवाल ऐसा भी जो दम तोड़ती हुई नजर आ रही है। उस सवाल को लगातार अनसुना किया जा रहा है, और वो सवाल है कि हाथऱस की बेटी को कब इंसाफ मिलेगा। कोई भी पीड़िता के परिवार के दर्द को समझने की जहमत नहीं उठा रहा है। शायद इसी का नतीजा है कि अब पीड़िता का परिवार खौफ में जिंदगी जीने को मजबूर हो चुका है। ये भी पढ़े :हाथरस केस: साजिश का पर्दाफाश, जातीय दंगे भड़काने के लिए मॉरिशस से की गई थी 50 करोड़ की फंडिंग

खौफ मे पीड़ित परिवार
वहीं, अब इस पूरे मसले को लेकर पीड़िता का परिवार खौफ में जिंदगी गुजारने को मजबूर हो चुका है। आलम यह है कि अब तो पीड़िता के परिवार ने गांव छोड़ने का फैसला कर लिया है। उनका कहना है कि अब हम गांव में नहीं रहना चाहते हैं। हमसे कोई बात नहीं कर रहा है। हम से सब दूरी बना रहे हैं। आरोपियों के परिवार की तरफ से भी हम पर दबाव बनाया जा रहा है। हमारे दिल पर क्या बीत रही है कि यह कोई जानने को तैयार नहीं है। अब हम इस गांव में नहीं रहेंगे। अपने किसी रिश्तेदार के पास चले जाएंंगे। भीख मांग लेंगे, लेकिन अब हमें इस गांव में रहना मंजूर नहीं है।

पीड़िता के पिता का दर्द 
उधर, मीडिया से मुखातिब होते हुए पीड़िता के पिता ने कहा कि अब हम इस गांव में नहीं रहेंगे। कहीं और चले जाएंगे। अपने किसी रिश्तेदार के यहां चले जाएंगे, लेकिन अब इस गांव में नहीं रहेंगे। बहरहाल, पीड़िता के परिवार के इस खौफ के पीछे की वजह क्या है? यह तो फिलहाल अभी तक पता  नहीं चल पाया है, लेकिन अब यह पहले की तुलना कहीं ज्यादा संजीदा सवाल प्रदेश सरकार पर खड़े करती हुई नजर आ रही है। पीड़िता के पिता ने कहा कि हमने अपनी एक बेटी खोई है। अब हम में कुछ और झेलने की ताकत नहीं रही। वहीं, पीड़िता के भाई ने कहा कि अब तो हालात ऐसे बन चुके हैं कि हमारे छोटे भाई को भी धमकी मिल रही है।

ध्यान रहे कि पीड़िता के ये बयान प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े करती हुई नजर आ रही है। कानून को महफूज रखने वाले सूबे के हुकूमतकर्ताओं से यह सवाल करना मुनासिब है कि आखिर क्या कर रहे हैं आपके खाकीवर्दी वाले और वे सभी लोग जो अपने आपको कानून रक्षक का बताने से गुरेज नहीं करते।

14 सितंबर.. 
यह एक खौफनाक दिन था। जब पीड़िता के साथ इस तरह की दरिंदगी को अंजाम दिया गया। 19 वर्षीय दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। उसकी जीभ काटी गई थी। उसके रीढ़ की हड्डी पर भी चोट लगी थी। इसके बाद उसे अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। उसके बाद उसे दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, लेकिन  वहां पीड़िता  युवती की मौत हो गई। ये भी पढ़े :हाथरस तो बहाना है, दंगा भड़काना है! ED की एंट्री से खुलेगी सबकी पोल..CM योगी का दावा