ई़डी को मिली बड़ी सफलता, खुल गई बाजपेयी की बेनामी संपत्तियों की पोल

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विकास दुबे की कहानी अब खत्म हो चुकी है, लेकिन इसके किरदार अभी-भी जांच एजेंसियों की फाइलों में जिंदा हैं। पिछले काफी दिनों से पुलिस इनकी तफ्तीश में जुटी है। इन्हीं में से एक किरदार है हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का खंजाची रहा जय वाजपेयी। जी हां.. ये वहीं वाजपेयी है, जो दुबे के काली कमाई को ठिकाने लगाने का काम करता था। कल तक मामूली सी जिदंगी जीने वाला जय वाजेपयी जब विकास के संपर्क में आया तो आखिर कैसे ही चंद समय में करोड़ों अरबों का मालिक हो गया? यह तो फिलहाल ईडी और आयकर विभाग के लिए जांच का विषय है, जिसकी तफ्तीश जारी है।

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जांच की इस कड़ी में कई अहम खुलासे हो रहे हैं। ईडी ने अब जय वाजेपयी के बेनामी संपत्तियों के ठिकाने का पता लगाया है, जो आगे चलकर जांच में अहम किरदार अदा कर सकते हैं। वाजपेयी की ये संपत्तियां  आर्य नगर, स्वरूप नगर और हर्ष नगर में हैं। इन संपत्तियों की कीमत 4 करोड़ रूपए आंकी जा रही है। इनके इतर तीन संपत्तियों को जांच विंग में शामिल कर रखा है। जांच में डेढ करोड़ रूपए के कैश का लेन देन का भी खुलासा हुआ है। वहीं शहर के डेढ़ दर्जन व्यपारियों के साथ 90 लाख की बीसी का खेल अलग से पकड़ा है।

यहां पर गौर करने वाली बात यह है कि यह जांच प्रवर्तन निदेशालय के पास आने के बाद ब्रहानगर के खिलाफ जांच में तेजी आई थी। ईडी पिछले पांच दिनों से शहर में रहकर इस पूरे् मामले की जांच कर रही है। इस बीच ईडी की टीम ने जय वाजपेयी के भाइयों की सपत्तियों की जांच की भी पेमाइश की है। जय के वित्तीय लेन देन के जांच करने हेतु  बैंक के खातों का पांच साल का डाटा निकलवाया गया है। इसमें जय के दो डमी खाते भी सामने आए हैं। यह वह संदिग्ध खाते हैं, जिनके जरिए एक महीने में डेढ करोड़ रूपए तक लेन देन किए गए हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मई 2018 से लेकर अगस्त 2019 तक करोड़ों के लेन देन का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों को इस बात का  शक है कि कहीं इस लेन देन का संबंध विकास दुबे से हो सकता है। फिलहाल इस संदर्भ में जांच मुकम्मल होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

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