court hammer

बाराबंकी। कोर्ट का आदेश नहीं मानना थानेदार और नायब तहसीलदार को भारी पड़ गया। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी कोर्ट ने पहले थानेदार और नायब तहसीलदार को घंटों न्यायिक अभिरक्षा में खड़ा रखा। बाद में कार्रवाई करते हुए दोनों को जेल भेज दिया। ज्ञात हो कि यहां जमीन के एक मामले में कोर्ट के स्टे के बावजूद पुलिस-प्रशासन ने निर्माण गिरवाया था। कोर्ट के स्टे बावजूद पुलिस-प्रशासन ने विपक्षियों के पक्ष में निर्माण गिरवाया था। निर्माण गिरवाये जाने के बाद पीड़ित पक्ष ने न्यायालय में अदालत की अवमानना की शिकायत की थी। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर कोर्ट ने बेहद कड़ा एक्शन लेते हुए दोनों को सजा सुनाई है। इस आदेश के खिलाफ अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम नित्यानंद श्रीनेत्र की कोर्ट में अपील की गई, जिस पर उन्होंने फैसले पर स्थगनादेश दे दिया।

ऐसे हुई कार्रवाई

कोर्ट ने नगर कोतवाल अमर सिंह को तीन दिन के लिए जेल भेजा है, जबकि नायब तहसीलदार केशव प्रसाद को भी कोर्ट ने एक महीने की सजा सुनाई है। कोर्ट नंबर 13 के मुंशिफ मजिस्ट्रेट खान जीशान मसूद ने यह फैसला सुनाया है। जमीन का यह पूरा मामला नगर कोतवाली क्षेत्र में आने वाले आलापुर में स्थित जमीन से जुड़ा है। कोर्ट की इस कार्रवाई पर पीड़ित पक्ष ने खुशी जाहिर की और कहा कि उसे विपक्षियों द्वारा लगातार परेशान किया जा रहा था। कोर्ट ने सही निर्णय दिया है।

विपक्षी कोर्ट के स्टे के बावजूद लगातार उसकी जमीन पर कब्जा कर रहे थे। पुलिस-प्रशासन ने उसकी जमीन पर बने निर्माण को जाकर गिरवा भी दिया। पीड़ित पक्ष के वकीलों ने बताया कि कोर्ट की अवमानना के मामले में यह पूरी कार्रवाई की गई है। हालांकि इस आदेश के खिलाफ अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम नित्यानंद श्रीनेत्र की कोर्ट में अपील की गई, जिस पर उन्होंने फैसले पर स्थगनादेश दे दिया और 28 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई का आदेश दिया। इस कार्रवाई के चलते पुलिस प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है।

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