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लखनऊ। चुनाव के साथ उत्तर प्रदेश में बिजली की सियासत तेज हो गयी है। उत्तर प्रदेश प्रदेश में बिजली दरों में कमी को लेकर कवायद तेज होती दिख रही है। दरअसल उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि यूपी में विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर उदय व ट्रू-अप में कुल लगभग 20,596 करोड़ रुपए निकल रहा है। इसके एवज में प्रदेश के उपभोक्ताओं की बिजली दरों में कमी की राहत दी जानी चाहिए। उपभोक्ता परिषद की तरफ से इस संबंध में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में याचिका भी दाखिल की गई है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन के निर्देश पर आयोग सचिव संजय कुमार सिंह ने उपभोक्ता परिषद के बिजली दरों में कमी करने के लिए पहल शुरू कर दिया है। दाखिल प्रस्ताव पर पावर कॉर्पोरेशन के मुख्य अभियन्ता टैरिफ यूनिट से 2 सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

शुक्रवार को परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग चेयरमैन आर पी सिंह से मुलाकात की। इस दौरान अवधेश कुमार वर्मा ने बिजली दरों में कमी कराने के लिए एक प्रस्ताव फिर से पूर्व दाखिल पुनर्विचार याचिका के क्रम में सौंपा। उपभोक्ता परिषद ने आयोग के सदस्यगण विनोद कुमार श्रीवास्तव व कौशल किशोर शर्मा से भी इस मुददे पर चर्चा की है। उपभोक्ताओं को राहत दिलाने की दिशा में आयोग से विचार करने की मांग उठाई है। इस पर आयोग के चेयरमैन और सदस्यों ने कहा कि पावर कॉर्पोरेशन से जवाब आने पर आयेाग नियमों की परिधि में कार्यवाही करेगा। सम्भव है कि इससे बिजली की दरों में कमी आ सकती है। इस संबंध में उपभोक्ता परिषद का कहना है कि प्रदेश के ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा से भी उनकी बात हुई है और शनिवार को वह उनसे इस मामले मुलाकात करेगा। उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाना होगा।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि 2 अगस्त, 2021 को बिजली दर जारी होने के तुरन्त बाद उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर निकल रहे करोडों रुपयों के एवज में आयोग में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। याचिका में यह मुददा उठाया गया था कि प्रदेश में सभी 3 करोड़ विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों को निकाला जाय तो एकमुश्त बिजली दरों में 34 प्रतिशत कमी हो जाएगी। बिजली कम्पनियों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उपभोक्ता परिषद् ने अगले पांच वर्षो तक हर वर्ष लगभग 6.8 प्रतिशत रेगुलेटरी रिबेट व विद्युत दरों में कमी का प्रस्ताव सौंपते हुए आयोग से टैरिफ पर पुनर्विचार की मांग उठाई गयी थी। इस सम्बन्ध में अवधेश वर्मा का कहना है कि बिजली कम्पनियों पर उपभोक्ताओं का इस बार भी कुल लगभग 1059 करोड़ सरप्लस निकला है। वही प्रदेश के उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर पहले भी कुल लगभग 19537 करोड़ उदय व ट्रूप में निकला था। सब मिलाकर देखा जाय तो प्रदेश के उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर कुल लगभग 20596 करोड़ रुपया सरप्लस हो गया है।

उपभोक्ता परिषद ने कहा यदि बिजली दरों में उपभोक्ताओ की निकले लगभग रुपया 20596 करोड़ का लाभ वर्तमान अनुमोदित आकलित राजस्व 60701 करोड़ के एवज में निकाला जाय तो एकमुश्त बिजली दरों में 34 प्रतिशत कमी करनी पड़ेगी। इससे उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा। बिजली कम्पनियों की आर्थिक स्थित को देखते हुए उपभोक्ता परिषद् ने पांच वर्षो तक कमी निम्न वत प्रस्तावित किया है, जिससे उपभोक्ताओं का हिसाब बिजली कम्पनियों से बराबर हो सके। वर्ष 2021-22 से लेकर हर साल बिजली दरों में 6.8 प्रतिशत कमी की जाए तो वर्ष 2025-26 तक हिसाब बराबर हो जाएगा। परिषद ने आयोग से अपनी पुनर्विचार याचिका में कहा कि जब उपभोक्ताओं पर बिजली कम्पनियों का ट्रूप में पैसा निकला तो कई वर्षों तक प्रदेश के उपभोक्ताओं ने रेगुलेटरी सरचार्ज पहले 3.71 प्रतिशत और 4.28 प्रतिशत भरा था। अब जब प्रदेश के उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर रुपया 20596 पैसा निकल रहा तो बिजली दरे कम होनी चाहिए। इससे उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।

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