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भाजपा ने बनायी रणनीति, अतिपिछड़ों पर दांव लगा कर पार होगी चुनावी नैया

  • अतिपिछड़ों केे नेता बाबू सिंह कुशवाहा एक बार यूपी के सियासी समीकरण में

लखनऊ। विधानसभा चुनाव को लेकर पहले और दूसरे चरण के लिए भाजपा के प्रत्याशियों की सूची आ चुकी है। इस बीच भाजपा में मची भगदड़ को भरने के लिए बड़ी रणनीति बनायी गयी है। भारतीय जनता पार्टी से तीन मंत्रियों के साथ अब तक 14 विधायकों का इस्तीफा हो चुका है। स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ छह विधायकों ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। भाजपा से जाने वाले 14 विधायकों के डैमेज कंट्रोल को भरने के लिए बीजेपी ने उसी वर्ग के दूसरे नेता पर दांव लगाने वाली है। बीजेपी के कुछ बड़े नेता उत्तर प्रदेश के अति पिछड़ों के नेता जन अधिकार पार्टी के संस्थापक बाबू सिंह कुशवाहा से संपर्क साध रहे हैं। बाबू सिंह कुशवाहा को भाजपा में लाने के पर्दे के पीछे सियासी चाल चली जा रही है। गठबंधन के लिए कुछ शर्तों पर जरूर तैयार हो जाएगी। बाबू सिंह कुशवाहा अति पिछड़ों की हिस्सेदारी व मान सम्मान को लेकर बीजेपी के साथ गठबंधन कर सकते हैं। भागीदारी संकल्प मोर्चा गैर यादव पिछड़ी जातियों का एक बहुत बड़ा नेतृत्व बन कर उभरा था जो यूपी में आगामी सत्ता के लिए विकल्प के रूप में अंकुरित हो रहा था।

बाबू सिंह कुशवाहा अतिपिछड़ों के हक के लिए अकेले ही बिगुल बजा रहे थे। कुशवाहा, मौर्य, शाक्य और सैनी समाज को सर्वाधिक जागरूक करने वाले तथा राजनीतिक हिस्सेदार बनाने वाले बसपा के पूर्व कद्दावर नेता बाबू सिंह कुशवाहा की अपने समाज पर सर्वाधिक पकड़ है यह सर्वविदित है। अगर बाबू सिंह कुशवाहा बीजेपी से गठबंधन करते हैं तो सपा के एक नया समीकरण से सामना होगा। हवाओं का रुख बदल सकता है क्योंकि जन अधिकार पार्टी में अब भी कुशवाहा, मौर्य, शाक्य और सैनी के अलावा अन्य कई गैर यादव पिछड़ी जातियों की तथा उनके नेताओं की आस्था बनी हुई है। वह सब जन अधिकार पार्टी के साथ मजबूती से लगे हुए हैं।

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने प्रेसवार्ता कर साफ संदेश दे दिया है कि अब भाजपा से इस्तीफा दे कर आने वालों के लिए जगह नहीं है। बीजेपी के कुछ विधायक टिकट कटने के बाद सपा की ओर निहारें लेकिन बीजेपी उन्हीं का टिकट काट रही है जिन्हें जनता नापसंद कर रही है। जो जनता के मन से उतर चुके हैं और उनकी विधानसभा क्षेत्र में पकड़ कमजोर हो चुकी है ।  बाबू सिंह कुशवाहा अगर भाजपा में आते हैं तो जातिगत समीकरण साधने की कोशिश होगी। अगर ऐसा होता है तो राजनीतिक विश्लेषकों को नया पैमाना बनाना होगा। शनिवार को बसपा प्रमुख मायावती ने प्रेसवार्ता कर जहां उम्मीदवारों की सूची जारी कीं, वहीं अखिलेश यादव भी कार्यकताओं के साथ सियासी समीकरण बनाने में लगे हैं। राजनीति का ऊंट उत्तर प्रदेश में किस करवट बैठेगा कहना बहुत जल्दबाजी होगी क्योंकि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही गुजरता है।

भाजपा छोड़ने वाले विधायक

1. स्वामी प्रसाद मौर्य
2. भगवती सागर
3. रोशनलाल वर्मा
4. विनय शाक्य
5. अवतार सिंह भाड़ाना
6. दारा सिंह चैहान
7. बृजेश प्रजापति
8. मुकेश वर्मा
9. राकेश राठौर
10. जय चैबे
11. माधुरी वर्मा
12. आर के शर्मा
13. बाला प्रसाद अवस्थी
14. डॉ धर्म सिंह सैनी

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राजनीतिक विश्लेषक राहुल कुमार गुप्ता की रिपोर्ट