बस्ती: एसओ गौर, रक्षक बना भक्षक, थानेदारी की रौब से कटवाई जा रही है सागौन की लकड़ियां और आलाधिकारी हैं मौन

686

‘वृक्षों की जब करोगे रक्षा, तभी बनेगा जीवन अच्छा’…अब जब रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे तो अपनी आखिरी सांसें गिनने में मसरूफ इन वृक्षों को आखिर कहां इंसाफ मिल पाएगा, लिहाजा हमारा प्रयास है कि वृक्षों की इन रूदन भरी संवेदनाओं को बेहद बेबाकी, निर्बाध व सुचारू रूप से आप तक पहुंचा सके, जो कभी विकास के नाम पर तो कभी अपनी निजी स्वार्थ की पूर्ति करने के नाम पर व्यापक स्तर पर पेड़ों की कटाई करने में दिलचस्पी रखते हैं। ये भी पढ़े :बस्ती के बैंक में बिल्कुल फिल्मी अंदाज में दिनदहाड़े हुई लूट, बेखौफ बदमाशों ने ग्राहकों सहित बैंक से लूटे लाखों रूपए

अब इसी बीच, हमारे पास जो खबर सामने आई है, वो भी पेड़ों की कटाई से ही संबंधित है। खबर के मुताबिक, सूबा उत्तर प्रदेश.. सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ… जिला बस्ती..थाना गौर के पास आरा मशीन पर सागौन के पेड़ों की कटाई बड़े पैमाने पर करके लकड़ी लाई गई है। यहीं नहीं, पेड़ों की लकड़ी के बोटों की चिरान हो रही है। वहीं, जब एक पत्रकार ने इस पूरी घटना को अपने कैमरे में कैद करने की कोशिश की तो मौके पर मौजूद थाने का ही सिपाही इसका विरोध करने लगा, मगर इसके बावजूद उस पत्रकार ने बेहद बेबाकी और दिलेरी के साथ सवाल किया कि, ‘पहले आप हमें ये बताइए कि ये लकड़ी किसकी है’? पहले तो वहां मौजूद आरा मशीन के मालिक बब्लू खान ने जवाब देने से गुरेज किया, मगर जब उस पत्रकार ने आरा मशीन के मालिक को बताया कि आप सच बताइए नहीं तो आप भी फंस जाएंगे और इसके साथ ही गंभीर परिणाम भुगतने की बात कही तो उसने फौरन बता दिया कि ये लकड़ियां एसओ गौर की है।

वहीं, जब यूपी वार्ता के पत्रकार ने एसओ गोर को फोन किया तो उन्होंने इस लकड़ी के बारे में कुछ भी बताने से आनाकानी किया। मगर जब लकड़ी उनकी नहीं है, तो किसकी है? अगर लकड़ी उनकी नहीं है तो वीडियो में आरा मशीन के मालिक बब्लू खान ऐसा क्यों कह रहे हैं कि ये लकड़िया एसओ गौर की है? वहीं, लकड़ी का वीडियो वायरल होते ही लकड़ी कहां भेज दी गई? थाने का सिपाही वहां बैठकर लकड़ी को क्यों चिरवा रहा था? अगर लकड़ी की खरीद-फरोख्त हुई तो इतना सारा पैसा कहां से आया? किसके खाते से गया? कहां गया? और ये पैसा किसको दिया गया? अब ऐसे में सवाल ये है कि इतने सारे पेड़ों की कटाने की अनुमति कहां से मिली है?

यहां पर हम आपको बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। सवाल यह है कि SO गौर अनिल कुमार दूबे के पास सागौन के पेड़ों की लड़की काफी भारी मात्र में कहां से आई। गौरतलब है कि वन विभाग के नियमोंं के मुताबिक, पेड़ों की कटाई करना कानूनन जुर्म है। अब ऐसे में सवाल खड़े होते हैं कि क्या इनके पास वन विभाग का परमिट मौजूद था? वन विभाग के नियमों के मुताबिक, किसी खास परिस्थिति में ही पेड़ों की कटाई की जा सकती है।

गौरतलब है कि बस्ती के तमाम वनक्षेत्र एसओ गौर अनिल कुमार दूबे के मताहत ही आता है, मगर अपनी दी गई शक्ति का इस तरह बेजा इस्तेमाल करना दूबे साबह पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। सवालों तो कई खड़े होते हैं, मगर कुछ बड़े सवाल है, जिनका जवाब सूबे की जनता-जनार्दन जानने के लिए बेहद उत्सुक है, कि आखिर दूबे साबह के पास इतनी भारी मात्र में सागौन के पेड़ों की लकड़ियां कहां से आई? क्या दूबे साहब ने कहीं से इन लकड़ियों को बरामद किया था? ये तो फिलहाल जांच का विषय है, मगर अफसोस कहीं से भी जांंच की उम्मीद होती हुई नजर नहीं आ रहा है, चुंकि एसपी के रवैये से साफ जाहिर होता है कि एसपी साहब का संरक्षण गौर एसओ दूबे साहब को मिला हुआ है।

वहीं, ये पूरा मामला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सपने को पूर्ण करने की दिशा में रोड़े अटकाता हुआ नजर आ रहा है। उल्लेखनीय है योगी आदित्यनाथ सूबे को देश का सर्वश्रेष्ठ, सर्वोत्तम व विकसित प्रदेश बनाने की दिशा में एक तरफ जहां प्रतिबद्ध व संकल्पबद्ध नजर आ रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ गौर थाना अनिल दूबे इनकी मंशा को मुकम्मल करने की दिशा में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।

अब इस मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल, जो इस समय बस्ती की हर गलियों में गूंज रहा है, वो ये है कि आखिर इस पूरे मामले को लेकर एसपी साहब मौन क्यों है? आखिर क्या है एसपी साहब के मौन होने के पीछे की कहानी? आखिर कौन है, जो थानाध्यक्ष को बचा रहा है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, चूंकि इस समय बस्ती का जर्रा-जर्रा एसपी साहब से सवाल कर रहा है, कि एसपी साहब, कब होगी एसओ पर कार्रवाई। हालांकि, एसपी साहब की छवि बेहद पाक व साफ, मगर इस मामले में उनका रवैया संदिग्ध व सवालों के घेरे में है।

बस्ती: एसओ गौर, रक्षक बना भक्षक, थानेदारी की रौब से कटवाई जा रही है सागौन की लकड़ियां

'वृक्षों की जब करोगे रक्षा, तभी बनेगा जीवन अच्छा'…अब जब रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे तो अपनी आखिरी सांसें गिनने में मसरूफ इन वृक्षों को आखिर कहां इंसाफ मिल पाएगा, लिहाजा हमारा प्रयास है कि वृक्षों की इन रूदन भरी संवेदनाओं को बेहद बेबाकी, निर्बाध व सुचारू रूप से आप तक पहुंचा सके ।

Posted by UP Varta on Friday, December 6, 2019

वहीं, बात अगर एसओ गौर की करें तो उनका पूरा बैकग्राउंड ही सवालों की बीच घिरा हुआ है। इससे पहले भी वे गंभीर आरोपों का सामना कर चुके है, जिसकी तस्वीर वो आज तक साफ नहीं कर पाए। गौरतलब है कि इनके ऊपर पहले भी कई सारे गंभीर आरोप लग चुके हैं। मगर अफसोस आलाधिकारियों ने आज तक इनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा, जिसकी बानगी आज हमें देखने को मिली है। वनों की कटाई को लेकर एसपी साहब का रवैया एसओ को लेकर भी सवालों के घेरे में है।

Read also :बस्ती: बजट है नहीं, रुक गया रोडवेज पर विकास का काम

Read also :बस्ती के कप्तानगंज में प्रेमी जोड़े का शव मिलने से सनसनी, परिवार ने लगाए हत्या के आरोप