बस्तीः मोदी सरकार की योजना झाड़ियों में खा रही जंग, दिव्यागों को नहीं मिला लाभ

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basti

सरकार आती है सरकार जाती है। कोई सरकार देश के लिए काम करती है तो कोई सरकार बस आकर चली जाती है। लेकिन, जो सरकार देश के लोगों के लिए काम करना चाहती है उनके कामों में अड़ंगा लगाते हैं ऐसे तमाम नेता, जो लोगों तक सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं को उन तक पहुंचा ही नहीं पाते। अब जब केंद्र में मोदी सरकार आई तो विकलांगों के लिए कई सारी कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत हुई। उन्हें सरकारी दस्तावेजों से लगायत हर कहीं दिव्यांगजन कहा जाने लगा। सरकारी योजनाओं को सरकार के कुछ माननीयों ने कैंप लगाकर विभागीय सहयोग से दिव्यांगजनों को जरूरी उपकरण मुहैया कराये जाने लगे। लेकिन, देश के सबसे बड़े सूबे में ऐसा नहीं हुआ। यहां तो बस्ती जिले में पूरी कहानी ही बदल गई।

दरअसल यूपी के बस्ती जिले में केंद्र सरकार की योजना के अंतर्गत बस्ती सांसद हरीश द्विवेदी ने पहले तो इस योजना का विधिवत आयोजन किया। इसके लिए आइटीआइ परिसर का चयन किया गया। कार्यक्रम में लाभार्थियों को जरूरी उपकरण भी दिए गए। लेकिन, दूरदराज के क्षेत्रों के जो लोग उस शिविर में नहीं आ पाए। उन्हें जरूरी उपकरणों को पहुंचाना तो दूर उनकी देखरेख भी नहीं गई। शिविर सिर्फ चुनिंदा लोगों तक ही सिमट गया। दूरदराज के लोग केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ ही नहीं उठा पाए। आलम तो ये है कि, लाखों की ट्राईसाइकिलों को उनके हाल पर खुले मैदान में सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। आइटीआई मैदान की झाड़ियों में ट्राईसाइकिलें जंग खा कर जिम्मेदारों को मुंह चिढ़ा रही हैं।

यहां सबसे गौर करने वाली बात ये है कि, ये योजना दिव्यांगों के लिए है। और जो दिव्यांग है वो 50-60 किमी तक चलकर आने में सक्षम नहीं है। उनकी परेशानी जगजाहिर है। ये जानने के बाद भी जरूरी उपकरणों को उन तक पहुंचाने की तकलीफ अधिकारियों से नहीं उठाई गई। लेकिन, मैदान में सड़ने के लिए छोड़ ऐसे दिया जैसे अपनी जिम्मेदारियों से मुंह फेर लेना।

वहीं, जब ये बात मीडिया के सामने आई तो  जिला दिव्यांगजन अधिकारी एस.के. सिंह ने  कहा की, मेरी तरफ से ट्राई साइकिलों की खरीद नहीं हुई थी, ये उपकरण निदेशालय की तरफ से भेजी गई थी। जिसे सांसद हरीश द्विवेदी ने एक शिविर में दिव्यांगों को बांटा था। बहुत से लाभार्थी शिविर में नहीं आए इस कारण उपकरण बच गए। उन्हें रखने के लिए विभाग के पास जगह नहीं थी। तो सांसद हरीश द्विवेदी जी से बात कर उन्हें आइटीआई परिसर में रखने के लिए कहा गया। तो इस पर हामी भर दी गई। इसीलिए ट्राईसाइकिलों को खुले परिसर में रखा गया। फिलहाल इस संबंध में अब तक सांसद हरीश द्विवेदी की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। ये भी पढ़ेंः- बस्तीः 28 दिन बाद भी प्रशासन के हाथ खाली, पत्रकार पर हमला करने वाले बदमाश पुलिस की पहुंच से कोसों दूर

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