योगी राज में अयोध्या के नगर आयुक्त पर गिरी तबादले की गाज, 1 IAS समेत 8 PCS अफसरों का हुआ ट्रांसफर

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8 PCS officers transferred in UP

उत्तर प्रदेश (Uttar pradesh) में एक बार फिर तबादले का दौर जारी है. हाल ही में योगी सरकार (Yogi Government) ने एक बड़ा फैसला किया है. दरअसल बीते गुरूवार की शाम एक आईएएस (IAS) समेत 8 पीसीएस (PCS) अफसरों के तबादले की लिस्ट जारी की गई है. खबर है कि सरकार की ओर से दिए गए नए आदेश के मुताबिक आईएएस नीरज शुक्ला को नगर आयुक्त की पोजिशन से हटाकर उन्हें लखनऊ के अपर आवास आयुक्त का पदभार दिया गया है. दरअसल प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के तहत अयोध्या में विकास योजना और सरकारी परियोजनाओं को लेकर चल रही समीक्षा मीटिंग के बाद नगर आयुक्त को उनके पद से हटाने का निर्णय लिया है.

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इसके साथ ही सीएम योगी (CM Yogi) ने उस फैसले पर भी अपनी सहमति जताई है जिसमें 8 पीसीएस अधिकारियों का भी तबादला किया गया है. मीडिया खबरों की माने तो तबादले के बाद पीसीएस अधिकारी विशाल सिंह को अयोध्या के लिए रवाना किया गया है. जबकि नीरज शुक्ला के पद पर अब सुनील वर्मा को सचिव (वाराणसी विकास प्राधिकरण) और CEO (काशी विश्वनाथ मंदिर) नियुक्त किया गया है. साथ ही हरिकेष चौरसिया को ACEO गोरखपुर प्राधिकरण का कारोभार सौंपा गया है.

इसके अलावा बात करें बाकी अधिकारियों की तो मदन सिंह गर्दियाल को ADM(E) मेरठ के पद पर तैनात किया गया है. कमलेश चंद्र को एडीएम (LA) गाजियाबाद की जिम्मेदारी सौंपी गई है. विपिन कुमार को सिटी मजिस्ट्रेट, गाजियाबाद के पद पर नियुक्त किया गया है. जबकि सूर्य प्रताप शुक्ला को ओएसडी ग्रेटर नोएडा का पद सौंपा गया है. साथ ही सुनील कुमार को वक्फ न्याधिकरण का सदस्य बनाया गया है.

फिलहाल इस तबादले से पहले सीएम योगी की एक ओर से आदेश जारी किया गया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि विकास संबंधित कामों में तेजी लाई जाए. साथ ही ये सुझाव भी दिया था कि यदि इन कामों में स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों को सम्मलित किया जाए तो इसकी गति पहले के मुकाबले दोगुनी हो जाएगी. उन्होंने अपने आदेश में ये भी कहा था कि काम की क्वालिटी और समय में किसी भी प्रकार का ढीलापन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसी कारण हर काम के लिए नोडल अधिकारी को नियुक्त किया जाए. योगी ने अपने बयान में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि इन कामों से जुड़े अधिकारी वक्त-वक्त पर जाकर इसका निरीक्षण करें. यदि काम में क्वालिटी और वो समय के अंतर्गत नहीं किया जाए तो इससे संबंधित कार्यदायी संस्था को जवाबदेह के तौर पर उसके खिलाफ एक्शन लिया जाए.

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