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लखनऊ। अलकायदा समर्थित आतंकियों की गिरफ्तारी के एक साल पहले से एटीएस लगातार नजर बनाये हुए थी। उन्होंने आईबी और एनआईए की मदद से कई सुराग का पता लगा लिए थे। एटीएस ने एक साल तक लगभग 350 फोन नम्बरों के सर्विलांस और लिसनिंग प्रक्रिया के बाद इन आतंकियों के बारे में जानकारी एकत्रित की। सर्विलांस से काॅल सुने जाने के बाद फुलप्रूफ प्लान के साथ आतंकी गिरफ्तार किये गये। इन्हीं कॉल्स के जरिए आतंकियों के कानपुर कनेक्शन की भी जानकारी मिली थी।

एक साल पहले लॉकडाउन के दौरान एटीएस ने दो इंटरनेशनल कॉल्स इंटरसेप्ट की थीं। यह दोनों कॉल आतंकियों के हैंडलर उमर हलमंडी ने सीरिया और अफगानिस्तान में की थीं। इन कॉल्स को इंटरसेप्ट करने के साथ ही एजेंसी को कुछ और संदिग्ध नम्बर मिले जिससे पैनी निगाह बनानी पड़ी। इस काॅल को आईबी और एनआईए के साथ भी साझा किया गया। इस काॅल के जरिये ही संदिग्ध नम्बरों के मिलने के सिलसिला शुरू हो गया था।

सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियां 350 फोन नम्बरों पर एक साथ काम कर रही थी। इनमें से कुछ की लोकेशन ट्रेस की जा रही थी। कुछ को लिसनिंग पर लिया गया था और कुछ पर मुखबिर तंत्र को एक्टिवेट किया गया। इन्हीं नम्बरों का पीछा करत हुए एटीएस दोनों आतंकियों तक पहुंची। इसी दौरान एटीएस को कानपुर कनेक्शन और संदिग्ध गतिविधियों के बारे में भी जानकारी मिली।

ऐसा है कानपुर कनेक्शन
आतंकियों के कानपुर कनेक्शन की बात सामने आने के बाद पुलिस भी इसे लेकर हाईपर एक्टिव हो गई है। पुलिस कमिश्नर असीम अरूण के निर्देश पर सोमवार को भी पूरे शहर में सघन जांच की जा रही है। 250 प्वाइंट्स पर पिकेट लगाकर चेकिंग कराई गई। संदिग्धों की तलाश में होटल, ढाबों, सराय, मॉल्स और मुख्य बाजारों में चेकिंग की गई।

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