Friday, December 3, 2021

अखिलेश से आप नेता संजय सिंह की मुलाकात के बाद चढ़ा सियासी पारा, गठबंधन पर सियासी नजर

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी मेल-मुलाकातों केा दौर तेज हो गया है। इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह बुधवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की जिसके बाद सियासी अनुमान बढ़ गये हैं। सपा ने दोनों नेताओं के बीच इस मुलाकात को शिष्टाचारिक भेंट बताया है। उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए आप के प्रभारी संजय सिंह बुधवार को लखनऊ स्थित ‘जनेश्वर ट्रस्ट’ के दफ्तर पहुंचे और वहां सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। अखिलेश यादव और आप नेता संजय सिंह के बीच करीब एक घंटे तक मुलाकात चली।

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मुलायम और अखिलेश के जन्मदिन पर भी की थी मुलाकात

संजय सिंह और अखिलेश यादव के बीच हाल के दिनों में हुई ये तीसरी मुलाकात है। इससे पहले सोमवार को मुलायम सिंह के जन्मदिन के मौके पर भी संजय सिंह और अखिलेश के बीच मुलाकात हुई थी। उस मुलाकात के दौरान उन्होंने मुलायम सिंह को गुलदस्ता भेंट करते हुए अपनी तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा था। ‘भारतीय राजनीति के पुरोधा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नेता जी माननीय मुलायम सिंह यादव जी को जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं। लखनऊ स्थित उनके आवास पर मुलाकात कर उनके दीर्घायु की कामना की थी।

संजय सिंह जुलाई में अखिलेश यादव के जन्मदिन के मौके पर भी मिले थे। उस मुलाकात के दौरान भी उन्होंने अखिलेश यादव की तारीफ की थी। संजय सिंह ने अखिलेश और अरविंद केजरीवाल के बीच की समानताएं भी गिनाई थीं। उनकी इस मेल-मुलाकात और बयान को लेकर यूपी के सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गयी है। कुछ राजनीतिक विश्लेषक समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन के कयास से भी इनकार नहीं कर रहे हैं।

बड़े दलों से दूरी, छोटों से गठजोड़

अखिलेश यादव भी पहले कह चुके हैं कि वह पिछली बार की ‘गलती’ दोबारा नहीं करेंगे। पश्चिमी यूपी में जयंत के साथ गठबंधन लगभग हो चुका हैं। सीटों को बंटवारा होना बाकी है। अखिलेश यादव और आरएलडी के प्रमुख जयंत साफ कह चुके हैं कि दोनों दलों के बीच गठबंधन तय है, बस सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है और कुछ ही दिनों इस पर भी फैसला हो जाएगा। अखिलेश यादव या संजय सिंह की तरफ से अभी तक आप और सपा के बीच किसी तरह के गठजोड़ की बात नहीं कही गई है। सियासी जानकारों का कहना है कि इन शिष्टाचारिक भेंटों से ही गठबंधन की राहें खुलती हैं।

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