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श्रीराम मंदिर फैसले के बाद अयोध्या में कमिश्नर, IAS, MLA ने खरीदी बड़ी जमीन, योगी ने दिये जांच के आदेश

लखनऊ /दिल्ली। श्रीराम की नगरी अयोध्या को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से राम मंदिर का निर्माण तो शुरू हो गया लेकिन इससे जुड़े दूसरे पहलुओं पर विवाद भी आ रहे हैं। अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर के आसपास कई जमीनों को खरीदा गया है। यह जमीने अधिकारी, पुलिस अफसर, नेता से लेकर उनके परिवारवालों तक ने खरीदी है। जमीन खरीदी के इस मामले में योगी सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। पांच दिन के अंदर जांच की रिपोर्ट मांगी गई है।

अयोध्या जमीन खरीद मामले की होगी जांच

राज्य सरकार ने अयोध्या में जमीन खरीदने के इस संवेदनशील मामले की जांच विशेष सचिव राधेश्याम मिश्रा से करवाने का फैसला लिया है। चुनावी मौसम में राज्य सरकार की इस कार्रवाई को काफी अहम माना जा रहा है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि श्रीराम मंदिर के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। कई करीबियों का फायदा पहुंचाया जा रहा है।

इन लोगों ने खरीदा जमीन

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई बड़े अधिकारियों ने जमीन खरीदी थी। जमीन खरीदने वालों में अयोध्या में कमिश्नर रहे एमपी अग्रवाल, मेयर ऋषिकेश उपाध्याय, आईपीएस दीपक कुमार, रिटायर्ड आईएएस उमा धर द्विवेदी, पीपीएस अरविंद चैरसिया शामिल है। गोसाईगंज से विधायक रहे विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी ने महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट से 30 लाख रुपए में 2593 वर्ग मीटर जमीन खरीदी। खब्बू तिवारी के बहनोई राजेश मिश्रा ने राघवाचार्य के साथ मिलकर बरहेटा गांव में 6320 वर्ग मीटर जमीन 47.40 लाख रुपए में खरीदी। अयोध्या के दूसरे विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने दिसंबर 2020 में सरयू नदी के पार गोंडा के महेशपुर में 4 करोड़ में 14860 वर्ग मीटर जमीन खरीदी। वहीं इनके भतीजे तरुण मित्तल ने नवंबर 2019 में बरहटा माझा में 5174 वर्ग मीटर जमीन 1.15 करोड़ रुपए में खरीदी। अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य बलराम मौर्या ने अयोध्या मंदिर निर्माण स्थल से 5 किलोमीटर दूर गोंडा के महेशपुर गांव में 50लाख में 9375 वर्ग मीटर जमीन खरीदी।

अयोध्या में कमिश्नर रहे एमपी अग्रवाल के ससुर केपी अग्रवाल ने दिसंबर 2020 में महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट से 31 लाख रुपए में 2530 वर्ग मीटर जमीन बरेटा माझा गांव में खरीदी। अग्रवाल के बहनोई आनंद वर्धन ने महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट से ही 15.50 लाख रुपए में 1260 वर्ग मीटर जमीन ली। अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने तो फैसला आने से 2 महीने पहले ही सितंबर 2019 में 30 लाख रुपए में 1480 वर्ग मीटर जमीन खरीद ली। जुलाई 2018 में ऋषिकेश उपाध्याय ने अयोध्या के काजीपुर चितवन में दान के रुप में 2530 वर्ग मीटर जमीन ली जिसकी कीमत एक करोड़ से अधिक बताई जाती है।

अयोध्या में तैनात रहे एडिशनल एसपी अरविंद चौरसिया के ससुर संतोष चौरसिया ने जून 2021 में रामपुर हलवारा गांव में 4लाख में 126.48 वर्ग मीटर जमीन खरीदी। डीआईजी रहे दीपक कुमार के ससुराल पक्ष ने भी 1020 वर्ग मीटर जमीन महर्षि रामायण ट्रस्ट सहित 19 लाख 75000 में ली है। दीपक कुमार जमीन के सौदा के समय अयोध्या में तैनात नहीं थे। इस संबंध में डीआईजी रेंज अलीगढ़ दीपक कुमार का कहना है कि उनका इस जमीन की खरीद-फरोख्त से कोई लेना देना नहीं है।

चुनावी मौसम में विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा

अब इन लोगों में कुछ ने तो जमीन खरीदने की बात स्वीकार की है तो कुछ ने इससे साफ इनकार भी किया है। ऐसे में अब इस विवाद को शांत करने के लिए और सचाई पता लगाने के लिए जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अब जांच के आदेश के बीच विपक्ष ने इसे फिर बड़ा मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस की तरफ से सीधे पीएम मोदी से स्पष्टीकरण मागां जा रहा है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि अंधेर नगरी-चैपट राजाकृ। अयोध्याजीवी में लूट पर प्रधानमंत्री मोदीजी मौन है, आदरणीय मोदी जी, इस खुली लूट पर अब आप कब बोलेंगे? राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को हिंदु और हिंदुत्ववादी वाली बहस से जोड़ दिया है। वे कहते हैं कि हिंदू सत्य के रास्ते पर चलता है। हिंदुत्ववादी धर्म की आड़ में लूटता है।

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