बिकरू कांड जिसमें फर्जी दस्तावेज की मदद से सिम कार्ड लेने के मामला था उसके आरोपी अमर दूबे की पत्नी खुशी दूबे को पुलिस द्वारा किशोर न्याय बोर्ड में पेश किया गया, कोर्ट में बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि मामले में एसआईटी रिपोर्ट नहीं दी गई है, जिसके बाद बोर्ड ने खुशी द्वारा दिये गये बयान को भी दर्ज कर लिया है, फिर सुनवाई के लिये आगे की तारीख दे दी गई है।

फर्जी दस्तावेज का मामला दर्ज

अमर दूबे की पत्नी खुशी पर फर्जी दस्तावेज की सहायता से सिम कार्ड लेने का मुकदमा पुलिस ने दर्ज कर लिया था, जब बोर्ड ने पुलिस से खुशी दूबे के साथ नाबालिग होने के बाद भी बालिग जैसा व्यवहार करने का सवाल किया, तो पुलिस इस बारे में जवाब नहीं दे पाई । इसी के बाद पुलिस की ओर से अजीबोगरीब तर्क दिये जाने लगे।

जब सबके सामने खुशी दूबे ने पुलिस से सवाल किया , मुझे छोड़ने की बात कही गई थी, लेकिन मेरी जिंदगी बर्बाद की जा रही है, पुलिस चुप क्यों है, इसका जवाब पुलिस नहीं दे पाई. वहां खड़े दारोगा सिर झुकाये सब सुनते रहे, ज्ञात हो कि मामले में खुशी दूबे का ये दावा है कि वो निर्दोष है, पुलिस उसे फंसाने की लगातार कोशिश कर रही है।

क्या था मामला

बता दें कि बीते साल 2 जुलाई की आधी रात को बिकरु गांव में गैंगस्टर विकास दूबे और उसके साथियों ने डीएसपी और एसओ समेत 8 पुलिसकर्मियों को शहीद कर दिया था, एक-एक कर केAmar wife Khushi Dubey a close aide of the notorious Vikas in the Bikru  case rejected the bail - बिकरू कांड में कुख्यात विकास के करीबी अमर की पत्नी  खुशी दुबे की पुलिस वाले पर दर्जनों गोलियां चलाईं गईं थीं, इसी के बाद पुलिस और एसटीएफ ने मिलकर 8 दिन के अंदर ही विकास समेत 6 बदमाशों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था।

जेल के अंदर है 45 आरोपी

इस मामले में आरोपी पाए गये 45 लोग जेल में बंद हैं, केस का ट्रायल जारी है, 2 जुलाई 2020 की रात को चौबेपुर के जादेपुर धस्सा गांव निवासी राहुल तिवारी ने विकास दूबे और उसके साथियों पर हत्या की कोशिश करने का केस दर्ज कराया था,

केस दर्ज होने के बाद उसी रात करीब साढे बारह बजे तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेन्द्र कुमार मिश्रा के नेतृत्व में बिकरु गांव में दबिश की गई थी, किसी ने थाने से विकास को फोन किया, लेकिन वो भागने की जगह पहले से ही घात लगाकर बैठा हउआ था, घर के आगे पुलिस को रोकने के लिये जेसीबी लगाई थी, पुलिस के वहां पर पहुंचते ही बदमाशों ने उन पर छतों से गोलियां चलाना चालू कर दिया, चंद मिनटों में सीओ देवेन्द्र मिश्रा समेत 8 पुलिस वालों की हत्या हो गयी और सभी लोग फरार हो गये थे।

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