Israel Iran War के बीच जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली हुसैनी खामेनेई के निधन की खबरें सोशल मीडिया पर सामने आईं, तो उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में भी इसका गहरा असर देखने को मिला। रविवार सुबह से ही शहर के कई इलाकों में शोक का माहौल बन गया। शिया समुदाय के लोगों में बेचैनी और दुख साफ नजर आया। देखते ही देखते इमामबाड़ा परिसर के आसपास लोगों की भीड़ जुटने लगी और मातमी जुलूस निकालने की तैयारी शुरू हो गई। लोगों का कहना था कि खामेनेई सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के शिया मुसलमानों के लिए एक मजबूत आवाज थे।
इमामबाड़ा से निकला मातमी जुलूस
दोपहर होते-होते इमामबाड़ा परिसर से शोक जुलूस शुरू हुआ, जो चौक घंटाघर होते हुए वापस इमामबाड़ा में समाप्त हुआ। जुलूस में हजारों की संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए। हाथों में खामेनेई के पोस्टर, काले झंडे, तख्तियां और तिरंगा लिए लोग चल रहे थे। माइक के जरिए उन्हें ‘शहीद’ बताते हुए भावुक तकरीरें की गईं। कई जगह “इंसानियत के दुश्मनों मुर्दाबाद” जैसे नारे भी लगाए गए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने विरोध स्वरूप पोस्टर जलाकर अपना आक्रोश जाहिर किया। पूरे जुलूस के दौरान माहौल बेहद गमगीन और भावनात्मक बना रहा।
अंतरराष्ट्रीय तनाव का स्थानीय असर
उप-हेडलाइन: ईरान-इजरायल संघर्ष ने भारत तक बढ़ाई बेचैनी
खामेनेई के निधन की खबर ऐसे समय में आई है, जब ईरान और इजरायल के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अयोध्या में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने खुलकर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना था कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत पर हमला है। समुदाय के बुजुर्गों ने कहा कि खामेनेई ने हमेशा अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई और इसी वजह से वे निशाने पर रहे। हालांकि, कई लोगों के बीच यह सवाल भी बना रहा कि सोशल मीडिया पर चल रही खबरें कितनी सच हैं, लेकिन भावनाओं का सैलाब हर शक पर भारी पड़ता नजर आया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, शांति बनाए रखने की अपील
जुलूस को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। एसपी सिटी के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई और पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए रही। जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद इमामबाड़ा परिसर में तकरीर का आयोजन किया गया, जहां समुदाय के लोगों ने खामेनेई के जीवन, उनके विचारों और संघर्षों को याद किया। वक्ताओं ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की। प्रशासन की सतर्कता के चलते पूरे आयोजन में कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई।
