उत्तर प्रदेश के Ghaziabad में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। यहां एक मामूली पंक्चर बनाने की दुकान के पीछे छिपे जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी सुहेल भी शामिल है। ताजा कार्रवाई में नौशाद अली उर्फ लालू को हरियाणा के Faridabad से पकड़ा गया है। नौशाद कुछ महीनों पहले ही एक पेट्रोल पंप पर पंक्चर की दुकान चलाने लगा था। आसपास के लोगों को वह एक सामान्य कामगार लगता था, लेकिन पुलिस जांच में सामने आया कि वह एक बड़े जासूसी गिरोह का हिस्सा था।
फोटो-वीडियो भेजकर मिलते थे पैसे
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी लोग रेलवे स्टेशन और सुरक्षा बलों की गतिविधियों की फोटो और वीडियो बना जासूसी कर Pakistan तक भेजते थे। इसके बदले उन्हें हर फोटो के लिए 4 से 6 हजार रुपये तक मिलते थे। यह पूरा काम सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए किया जाता था। गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें इस नेटवर्क में सुहेल नाम के शख्स ने जोड़ा था। यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और देश के संवेदनशील इलाकों की जानकारी जुटाकर बाहर भेज रहा था। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं।
कैमरों के जरिए सीधे पाकिस्तान तक पहुंच रही थी जानकारी
जासूसी मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इस गैंग ने कई जगहों पर गुप्त कैमरे लगाने की योजना बनाई थी। जांच में पता चला है कि दिल्ली और हरियाणा के रेलवे स्टेशनों पर कुछ कैमरे लगाए भी गए थे, जिनका एक्सेस सीधे पाकिस्तान में मौजूद लोगों के पास था। यानि वहां बैठकर लोग भारत के संवेदनशील इलाकों की लाइव गतिविधियां देख सकते थे। पुलिस ने इन कैमरों को बरामद कर लिया है और उन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां और ज्यादा सतर्क हो गई हैं और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं।
पुलिस की कार्रवाई जारी, और गिरफ्तारी संभव
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस जासूसी मामले में अभी और भी खुलासे हो सकते हैं। पहले 14 मार्च को कौशांबी इलाके से 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनसे पूछताछ के बाद अन्य आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। अब तक कुल 22 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क के लोग आम लोगों की तरह ही अलग-अलग जगहों पर काम कर रहे थे, ताकि किसी को शक न हो। पुलिस अब इस पूरे गिरोह के मास्टरमाइंड और उसके विदेशी कनेक्शन को पूरी तरह से उजागर करने में जुटी है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश की सुरक्षा के खिलाफ काम करने वाले तत्व कितने चालाकी से अपनी पहचान छिपाते हैं।
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