मथुरा से आगरा की दूरी घटाने वाला उत्तरी बाइपास (Mathura Agra Northern Bypass) अब पूरी तरह बनकर तैयार है। 307 करोड़ की इस परियोजना ने हजारों यात्रियों के लिए उम्मीदें जगा दी हैं। लेकिन जब सभी को लगा कि जल्द ही इस मार्ग पर सफर शुरू हो जाएगा, तभी सामने आया “20 दिन का रहस्य”, जिसने पूरे उद्घाटन को रोक दिया है। वजह ऐसी कि प्रशासन भी फिलहाल चुप है।
20 मिनट में तय होगी रैपुरा जाट से खंदौली की दूरी
इस बाइपास के शुरू होते ही अब मथुरा से आगरा की यात्रा पहले से कहीं आसान हो जाएगी। फरह से खंदौली की दूरी जो पहले लगभग एक घंटे में तय होती थी, अब केवल 20 मिनट में पूरी की जा सकेगी।
चार अंडरपास, यमुना पर मजबूत पुल और चौड़ी सर्विस रोड इस परियोजना को भविष्य की यातायात जरूरतों के मुताबिक बनाया गया है। यह रास्ता दिल्ली से आगरा आने वाले यात्रियों के लिए भी वैकल्पिक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
किसानों की जमीन भी हुई अधिग्रहित
इस बाइपास का निर्माण कार्य वर्ष 2022 के अंत में शुरू हुआ था। हिलवेज कंपनी ने काम संभाला और जिला प्रशासन ने मथुरा, महावन और हाथरस की सादाबाद तहसील के करीब एक दर्जन किसानों की भूमि अधिग्रहीत की।
यह मार्ग NH-19 के किलोमीटर 174 से शुरू होकर यमुना एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 141 तक जोड़ा गया है। यहां से गुजरते समय यात्रियों को न केवल दूरी में राहत मिलेगी बल्कि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से भी छुटकारा मिलेगा।
लोग पहले ही कर रहे हैं आवागमन
हालांकि सड़क लगभग एक माह पहले पूरी हो चुकी है और स्थानीय लोग अनौपचारिक रूप से आवागमन भी करने लगे हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक बाइपास को चालू करने की अनुमति नहीं दी है।
दरअसल, असली वजह है हाईटेंशन लाइन की शिफ्टिंग, जो अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
चैनेज नंबर 11900 और 0500 पर मथुरा दिशा से आने वाली बिजली लाइन अभी अधूरी है। कुछ खंभे ऊंचे कर दिए गए हैं, मगर बाकी दो-दो खंभों की ऊंचाई का कार्य बाकी है, जिसमें लगभग 20 दिन और लगेंगे।
जेपी ग्रुप और HHAI उद्घाटन की घोषणा को लेकर सतर्क
इस परियोजना से जुड़े जेपी ग्रुप और HHAI अधिकारी चाहते हैं कि उद्घाटन से पहले हर तकनीकी काम पूरी तरह सुरक्षित रूप से निपटा लिया जाए।
अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही बिजली विभाग का कार्य पूरा होगा, औपचारिक उद्घाटन की तारीख घोषित कर दी जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बाइपास चालू होते ही फरह से खंदौली की दूरी पलक झपकते तय होगी और NH-19 से यमुना एक्सप्रेसवे का सफर देश के सबसे तेज़ मार्गों में शामिल हो जाएगा।
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