उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सभी 63 विभागों के 17 लाख से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का विशेष प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला ‘मिशन कर्मयोगी भारत’ के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य सरकारी तंत्र को अधिक दक्ष, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है। शासन की ओर से जारी आदेश में साफ कहा गया है कि अब तकनीकी जानकारी कोई अतिरिक्त योग्यता नहीं बल्कि नौकरी की अनिवार्य शर्त बन चुकी है। सरकार का मानना है कि आने वाले समय में बिना डिजिटल दक्षता के प्रशासनिक कार्य प्रभावी ढंग से नहीं चल पाएंगे। इसी सोच के साथ यह व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है, ताकि हर स्तर पर काम करने वाला कर्मचारी नई तकनीक के साथ तालमेल बिठा सके।
आदेश के बाद मची हलचल, सभी विभागों को सख्त निर्देश
12 फरवरी 2026 को प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक की ओर से औपचारिक आदेश जारी किए गए। इसके अगले ही दिन 13 फरवरी को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया गया कि वे अपने अधीन कर्मचारियों का पंजीकरण ‘कर्मयोगी भारत’ पोर्टल पर अनिवार्य रूप से कराएं। आदेश के अनुसार, प्रत्येक कर्मचारी को पोर्टल पर उपलब्ध तीन कोर्स पूरे करने होंगे, जिनमें ‘एआई का परिचय’ (Introduction to AI) हर हाल में करना अनिवार्य है। शासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल औपचारिकता नहीं बल्कि भविष्य की प्रशासनिक जरूरत है। विभागों में इस आदेश के बाद तेजी से कर्मचारियों का डेटा एकत्र किया जा रहा है और पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कई विभागों ने आंतरिक स्तर पर निगरानी टीमें भी बना दी हैं, ताकि कोई कर्मचारी इस प्रक्रिया से छूट न पाए।
कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन का गठन, विशेषज्ञ तैयार करेंगे पाठ्यक्रम
सरकार ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ‘कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन’ का गठन किया है। यह आयोग विशेषज्ञों की मदद से ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करेगा जो सीधे सरकारी कामकाज में उपयोगी हो। केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जाएगा। आवास विभाग ने भी अपने स्तर पर प्रदेश स्तरीय कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन का गठन कर दिया है, जिससे विभागीय कार्यों में डिजिटल सुधार तेजी से लाया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि AI के माध्यम से फाइलों के निस्तारण की गति बढ़ेगी, जनशिकायतों का विश्लेषण आसान होगा और डेटा आधारित निर्णय लेने में पारदर्शिता आएगी। उदाहरण के तौर पर, एआई सिस्टम यह पहचान सकेगा कि किस जिले या विभाग में शिकायतें लंबित हैं और समाधान में कहां देरी हो रही है। इससे जवाबदेही तय करना आसान होगा और आम जनता को बेहतर सेवा मिल सकेगी।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई, ‘स्मार्ट वर्किंग’ ही अब पहचान
शासन ने आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो अधिकारी या कर्मचारी निर्धारित समयसीमा में एआई कोर्स पूरा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का संदेश साफ है कि अब पारंपरिक कागजी प्रक्रिया से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी आधारित कार्यप्रणाली अपनानी ही होगी। ‘स्मार्ट वर्किंग’ और ‘टेक्नोलॉजी ड्रिवेन एडमिनिस्ट्रेशन’ को बढ़ावा देने के लिए यह कदम निर्णायक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह योजना सही तरीके से लागू होती है तो उत्तर प्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है जहां प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह डिजिटल और डेटा-संचालित होगा। इससे भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी। आने वाले महीनों में यह देखा जाएगा कि 17 लाख कर्मचारियों का यह विशाल प्रशिक्षण अभियान किस तरह राज्य की प्रशासनिक संस्कृति को बदलता है।
