उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) ने राजधानी लखनऊ में संभावित आतंकी हमले की बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि ये आतंकवादी पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के निर्देश पर काम कर रहे थे और राज्य के कई प्रमुख शहरों में हमले की योजना बना रहे थे। एटीएस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों का मुख्य लक्ष्य लखनऊ रेलवे स्टेशन था, जहां वे बड़े पैमाने पर विस्फोट और आगजनी की घटनाएं अंजाम देना चाहते थे। एजेंसी ने समय रहते मिली खुफिया जानकारी के आधार पर गुरुवार को कार्रवाई की और चारों आतंकियों को धर दबोचा, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
रेलवे और ट्रेनों को निशाना बनाने की थी साजिश
जांच में खुलासा हुआ कि यह आतंकी मॉड्यूल केवल लखनऊ तक सीमित नहीं था। गाजियाबाद और अलीगढ़ जैसे बड़े शहर भी इनके निशाने पर थे। आरोपियों ने ट्रेनों और रेलवे नेटवर्क को नुकसान पहुंचाने की योजनाएं बनाई थीं। उन्होंने रेलवे के सिग्नल बॉक्स को उड़ाने और ट्रेनों को पटरी से उतारने जैसे खतरनाक कदम उठाने का इरादा रखा था। इसके अलावा, आरोपियों ने गैस सिलिंडरों से भरे ट्रकों और प्रतिष्ठित संस्थानों में आगजनी कर अफरातफरी फैलाने की भी योजना बनाई थी। गिरफ्तार आरोपियों के पास से ज्वलनशील पदार्थ, सात मोबाइल फोन, आपत्तिजनक पर्चे और आधार कार्ड बरामद किए गए हैं।
सामाजिक मीडिया के जरिए विदेशी हैंडलर्स से जुड़ाव
एटीएस की पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Telegram, Instagram और Signal का इस्तेमाल कर विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे। ये प्लेटफॉर्म्स कट्टरपंथी समूहों और संदिग्ध अकाउंट्स के लिए माध्यम बन गए थे, जहां देश में दहशत फैलाने और माहौल बिगाड़ने की साजिशें रची जाती थीं। मॉड्यूल के सरगना साकिब उर्फ डेविल, जो मेरठ का रहने वाला है, पेशे से नाई है, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़ गया था। उसके साथी अरबाब भी इस नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था। दोनों ने पैसों के लालच में विकास उर्फ रौनक और लोकेश उर्फ पपला को अपने साथ जोड़ लिया।
बड़े नेताओं की रेकी और खतरे की व्यापक साजिश
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों ने कई बड़े नेताओं की रेकी भी की थी। एटीएस ने पूछताछ के दौरान कुछ नेताओं के नाम जानने में सफलता पाई है, हालांकि सुरक्षा कारणों से उनका खुलासा नहीं किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की योजना सिर्फ रेलवे हमले तक सीमित नहीं थी, बल्कि बड़े पैमाने पर दहशत फैलाने और प्रतिष्ठित स्थलों को निशाना बनाने की थी। मामले में भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है और जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते की गई कार्रवाई ने बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई।
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