लखनऊ के तहसीनगंज इलाके में रहने वाले आमिर अब्बास जैदी की जिंदगी बीते कुछ दिनों से डर और दुआओं के बीच झूल रही है। वजह है उनका बेटा रवीश जैदी, जो पिछले करीब 15–17 वर्षों से ईरान की राजधानी तेहरान में रह रहा है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे भीषण सैन्य टकराव ने हजारों किलोमीटर दूर बैठे इस पिता की नींद छीन ली है। आमिर बताते हैं कि सुबह करीब 10:30 बजे उनकी आखिरी बार बेटे से बात हुई थी। उस बातचीत में बेटे ने जो कहा, उसने पूरे परिवार को हिला कर रख दिया—जिस जगह वह रहता है, वहां से महज 100 मीटर की दूरी पर एक मिसाइल आकर गिरी थी। इसके बाद से संपर्क टूट गया और घर में सन्नाटा और बेचैनी दोनों गहराते चले गए।
100 मीटर की दूरी और टूटता संपर्क
आमिर अब्बास जैदी बताते हैं कि बेटे की आवाज में डर साफ झलक रहा था। रवीश ने फोन पर कहा कि आसपास धमाकों की आवाजें लगातार सुनाई दे रही हैं और हालात बेहद खराब हैं। जिस इमारत में वह रहता है, उसके पास ही मिसाइल गिरने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। फोन कॉल छोटा था, लेकिन उस एक मिनट की बातचीत ने पिता के दिल में डर का पहाड़ खड़ा कर दिया। इसके बाद कई बार कॉल करने की कोशिश की गई, लेकिन नेटवर्क ठप होने की वजह से संपर्क नहीं हो सका। लखनऊ में बैठा पूरा परिवार सिर्फ एक खबर का इंतजार कर रहा है—“बेटा सुरक्षित है।” हर गुजरता घंटा उनके लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं है, और हर धमाके की खबर दिल की धड़कनें और तेज कर देती है।
दिल का ऑपरेशन, सफर पर रोक और एंबेसी से उम्मीद
पिता आमिर बताते हैं कि रवीश इस समय ईरान में बिल्कुल अकेला है। कुछ समय पहले उसके दिल का ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे लंबा सफर करने से मना कर दिया है। यही वजह है कि हालात बिगड़ने के बावजूद वह तुरंत देश नहीं छोड़ पा रहा। आमिर कहते हैं कि वे लगातार इंडियन एंबेसी के संपर्क में हैं और हर संभव मदद की गुहार लगा रहे हैं। परिवार की चिंता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि युद्ध के हालात में दवाइयों, इलाज और सुरक्षित जगह तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। आमिर की आवाज भर्राते हुए कहती है—“हम बस यही चाहते हैं कि किसी तरह बेटा सुरक्षित रहे, बाकी सब अल्लाह पर छोड़ दिया है।” इस बीच मोहल्ले के लोग और रिश्तेदार भी लगातार घर आकर हौसला बंधा रहे हैं।
खामेनेई की मौत की खबर और शिया समुदाय का दर्द
ईरान में हालात इसलिए भी और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं क्योंकि वहां के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों ने शिया समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है। आमिर अब्बास जैदी कहते हैं कि खामेनेई शिया समुदाय के लिए सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक थे। उनकी मौत की खबर के बाद ईरान ही नहीं, बल्कि लखनऊ जैसे शहरों में भी शोक और गुस्से का माहौल है। आमिर मानते हैं कि मौजूदा जंग ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है, लेकिन उनके लिए यह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय खबर नहीं, बल्कि बेटे की जिंदगी से जुड़ा सवाल है। हर गुजरता पल उनके लिए दुआ, डर और उम्मीद का मिला-जुला अहसास लेकर आ रहा है।
