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स्कूल से रोते हुए घर लौटी 5वीं की छात्रा, फिर जो हुआ उसे देख कांप उठी रूह; 4 शिक्षकों पर गिरी गाज!

कन्नौज के बेहटा रामपुर में 10 वर्षीय छात्रा निधि की मौत ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षिका की डांट से आहत होकर छात्रा ने घर में फांसी लगा ली। परिजनों का आरोप, शिक्षकों के व्यवहार और स्कूल की बदहाली ने ली मासूम की जान। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

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कन्नौज जिले के सौरिख थाना क्षेत्र अंतर्गत बेहटा रामपुर गांव से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने गुरु-शिष्य के रिश्ते और स्कूली अनुशासन के तौर-तरीकों पर बहस छेड़ दी है। कंपोजिट विद्यालय में पढ़ने वाली महज 10 साल की मासूम छात्रा निधि ने मौत को गले लगा लिया। आरोप है कि स्कूल में शिक्षिका द्वारा गंदे कपड़ों को लेकर दी गई फटकार ने बच्ची के मन पर ऐसा गहरा आघात किया कि उसने घर जाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और ग्रामीण आक्रोशित हैं।

प्रार्थना सभा की वो ‘डांट’ और फिर खामोश हो गई धड़कनें

शनिवार की सुबह हर रोज की तरह सामान्य थी। निवारी गांव के रहने वाले अजय कुमार बाथम की पुत्री निधि अपनी साइकिल उठाकर स्कूल के लिए निकली थी। सुबह की प्रार्थना सभा चल रही थी, जहाँ शिक्षक बच्चों की साफ-सफाई और अनुशासन की जांच कर रहे थे। परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान एक शिक्षिका ने निधि को उसके कपड़ों की स्थिति को लेकर सबके सामने कड़ी फटकार लगाई। अपमान और दुख से भरी निधि अपना बस्ता स्कूल में ही छोड़कर रोते हुए घर भाग आई। जब माँ आरती देवी ने उससे रोने का कारण पूछा, तो वह बिना कुछ बोले सीधे कमरे में चली गई। कुछ देर बाद जब माँ कमरे में पहुँची, तो वहां का दृश्य देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई; निधि साड़ी के फंदे से लटकी हुई थी। आनन-फानन में उसे उतारा गया, लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं।

स्कूल परिसर बना अखाड़ा: 5 घंटे तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा

छात्रा निधि की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीण और परिजन आक्रोश से भर गए। वे छात्रा का शव लेकर सीधे विद्यालय परिसर पहुँच गए और वहां प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का गुस्सा इतना प्रचंड था कि स्कूल के शिक्षकों को खुद को एक कमरे में बंद कर अपनी जान बचानी पड़ी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक अजय कुमार और एसडीएम ज्ञानेंद्र कुमार द्विवेदी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। करीब पांच घंटे तक चले हंगामे के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जब अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर ग्रामीण शांत हुए और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने दिया गया।

स्कूल की बदहाली और शिक्षकों के व्यवहार पर उठे गंभीर सवाल

मृतका की बड़ी बहन रिया, जो उसी स्कूल में कक्षा 7 की छात्रा है, ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। रिया का कहना है कि स्कूल स्टाफ उसकी छोटी बहन को आए दिन छोटी-छोटी बातों पर प्रताड़ित करता था, जिससे वह अक्सर तनाव में रहती थी। सिर्फ इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने स्कूल की व्यवस्थाओं की भी पोल खोल दी। आरोप है कि विद्यालय में पीने के पानी के लिए लगा हैंडपंप वर्षों से खराब है, शौचालय गंदगी से अटे पड़े हैं और बच्चों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। जब अधिकारियों के कहने पर सफाईकर्मी सफाई करने पहुँचा, तो ग्रामीणों ने उसे वहां से खदेड़ दिया। लोगों का तर्क था कि जिस स्कूल की लापरवाही ने एक जान ले ली, वहां अब दिखावे की सफाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

4 शिक्षकों पर FIR दर्ज, पुलिस की हर पहलू पर पैनी नजर

इस मामले में पुलिस ने मृतका की मां की तहरीर पर कार्रवाई करते हुए स्कूल के चार शिक्षकों—मृदुला, आकांक्षा, रोहित पाल और महेंद्र सिंह यादव के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। हालांकि, शिक्षक संघ ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि शिक्षकों को जानबूझकर फंसाया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में सहपाठियों ने किसी भी तरह की मारपीट या कड़ी फटकार से इनकार किया है, लेकिन पुलिस हर बिंदु की गहराई से पड़ताल कर रही है। मृतका के पिता अजय कुमार, जो दिल्ली में सिलाई का काम करते हैं, इस घटना के बाद बदहवास हैं। मासूम निधि की मौत ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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