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नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत के पीछे छुपी बड़ी सच्चाई? SIT ने उसी जगह जाकर रीक्रिएट किया पूरा हादसा

ग्रेटर नोएडा सेक्टर 150 में इंजीनियर युवराज मेहता की कार पानी भरे गड्ढे में गिरने से हुई मौत के मामले में SIT ने घटनास्थल पर पहुंचकर पूरा हादसा रीक्रिएट किया। टीम ने ब्रेकर से लेकर कार गिरने की दूरी, स्पीड और रेस्क्यू की मुश्किलों तक हर पहलू को बारीकी से जांचा।

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ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में हुए दर्दनाक हादसे को लेकर जांच अब तेज हो गई है। इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में गठित एसआईटी (SIT) टीम गुरुवार शाम करीब 6:15 बजे मेरठ से घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने मौके पर करीब आधे घंटे तक रहकर पूरे इलाके का जायजा लिया और वहां मौजूद अधिकारियों से उस रात की पूरी जानकारी ली। बताया जा रहा है कि यह वही जगह है जहां युवराज की कार दीवार तोड़ते हुए पानी भरे गड्ढे में जा गिरी थी। टीम का उद्देश्य यह समझना था कि हादसा कैसे हुआ और किन कारणों से युवराज की जान नहीं बचाई जा सकी। इस दौरान अधिकारी बेहद गंभीर दिखे और हर छोटी बात पर ध्यान देते नजर आए।

ब्रेकर से लेकर कार गिरने तक हर पॉइंट किया गया मार्क

SIT ने जांच को मजबूत बनाने के लिए सड़क पर ब्रेकर से लेकर कार के गिरने तक की जगहों को मार्क किया। टीम ने यह भी देखा कि ब्रेकर कहां था, सड़क की स्थिति कैसी थी और उस हिस्से पर रोशनी की व्यवस्था थी या नहीं। मौके पर जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा, डीसीपी ग्रेटर नोएडा, एडीएम समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एसआईटी के प्रमुख एडीजी भानु भास्कर ने पूरे इलाके को करीब आधे घंटे तक बेहद ध्यान से देखा। जांच टीम का फोकस इस बात पर भी रहा कि कार किस दिशा से आ रही थी और किस पॉइंट पर नियंत्रण बिगड़ा। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि टीम किसी भी ऐसी कड़ी को छोड़ना नहीं चाहती, जो आगे जाकर जिम्मेदारों तक पहुंचने में मदद कर सके।

कार की स्पीड और रेस्क्यू में देरी तक की जांच

SIT ने केवल घटनास्थल को देखकर ही जांच नहीं की, बल्कि यह समझने की कोशिश भी की कि युवराज की कार कितनी तेज रफ्तार में रही होगी। टीम ने अनुमान लगाने की कोशिश की कि इतनी रफ्तार कैसे बनी कि कार दीवार को तोड़कर सीधे पानी में जा गिरी। इसके साथ ही यह भी जांचा गया कि रेस्क्यू ऑपरेशन कितना कठिन था और क्या समय पर बचाव संभव था। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने SIT को उस रात की हर जानकारी दी, जिसमें यह भी बताया गया कि कार कितनी दूरी तक जाकर गिरी थी और पानी की स्थिति कितनी गंभीर थी। सबसे अहम सवाल यही है कि यदि इलाके में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम होते, तो क्या युवराज की जान बचाई जा सकती थी। SIT इन सभी सवालों के जवाब तलाशने में जुटी है, ताकि इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की घटना के बाद किसी तरह की लापरवाही छुपाई न जा सके।

घने कोहरे की रात, दीवार टूटी और पानी में डूब गई कार

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का हादसा 16 और 17 जनवरी 2026 की रात का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, युवराज मेहता पेशे से इंजीनियर थे और उस रात घने कोहरे के कारण उनकी कार का नियंत्रण बिगड़ गया। कार एक दीवार तोड़ते हुए निर्माण स्थल के अंदर बने पानी भरे गड्ढे में जा गिरी। आरोप है कि बिल्डर और उसके सहयोगियों ने निर्माण स्थल पर सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरती थी। प्लॉट में भारी मात्रा में पानी भरा हुआ था और उस जगह पर पर्याप्त बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत नहीं थे। इसी वजह से कार सीधे पानी में डूब गई और युवराज की मौत हो गई। इस मामले में थाना नॉलेज पार्क में केस दर्ज किया गया है और पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। अब SIT अपनी रिपोर्ट तैयार कर 5 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी, जिसके बाद जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

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